UP High Schools Intermediate Colleges Samayojan Rok Latest News in Hindi

UP High Schools Intermediate Colleges Samayojan Rok Latest News in Hindi

UP High Schools Intermediate Colleges Samayojan Rok Latest News in Hindi :

Allahabad High Court ने राजकीय High Or Intermediate Colleges में Teachers के समायोजन के शासनादेश 29 June 2017 के अमल पर रोक लगा दी है! Court ने राज्य सरकार को इस संबंध में बेहतर जानकारी देने का निर्देश दिया है! याचिका की अगली सुनवाई 8 August को होगी!

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यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने Shailendra Kumar Singh व 107 अन्य Teachers की याचिका पर दिया है! माध्यमिक शिक्षा विभाग (Secondary Education Department) प्रदेश भर के 638 Teachers का समायोजन कर रहा है! याचिका में माध्यमिक शिक्षा निदेशक के 16 June 2017 के परिपत्र व 29 June 2017 के शासनादेश की वैधता को चुनौती दी गई है! जिसके तहत निदेशक ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों व जिला विद्यालय निरीक्षकों को यह निर्देश जारी किए थे कि वह सभी State Secondary Colleges में कार्यस्त अतिरिक्त शिक्षकों का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराएं! इसके बाद 29 June के शासनादेश से ऐसे अतिरिक्त Teachers को, जो State Secondary Colleges में कार्यरत है उन्हें समायोजित करने का आदेश जारी किया गया है! याची की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे का तर्क है कि परिपत्र और शासनादेश दोनों ही अवैधानिक है और अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 के उपबन्धों के विपरीत है! जिसमें कि Teachers की तैनाती का अनुपात निर्धारित किया गया है!

अनिवार्य शिक्षा कानून में यह व्यवस्था दी गई है कि Every Class में Science, Maths Or Language के लिए कम से कम एक Teacher होना अनिवार्य है! साथ ही 35 छात्रों पर न्यूनतम एक Teacher रखे जाने की व्यवस्था दी गई है! राज्य सरकार ने जो दिशा निर्देश जारी किए है उसके तहत Class 6 से 8 तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए Inter College के प्रवक्ताओं की तैनाती की गई है, जबकि इन छात्रों को पढ़ाने के लिए TET पास होना अनिवार्य है!
इन छात्रों को पढ़ा रहे Teachers के पास यह योग्यता नहीं है! सरकार ने जो भी दिशा निर्देश जारी किए है वह केवल Assistant Teachers पर ही लागू होती है, जो प्रवक्ताओं को प्रभावित नहीं करती! अधिनियम के इस उपबन्ध के बावजूद राज्य सरकार ने Junior High School के छात्रों को पढ़ा रहे प्रवक्ताओं का भी समायोजन करने का आदेश जारी किया है वह अनिवार्य शिक्षा कानून के विपरीत है! खरे का यह भी कहना है कि 29 June 2017 को जो शासनादेश जारी किया गया है वह पुराने शासनादेश 20 November 1976 और 1999 में जारी निदेशक के परिपत्र पर आधारित है! कहा कि यह शासनादेश व परिपत्र अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 लागू होने के पहले के है ऐसे में सरकार उन्हें आधार नहीं बना सकती! इससे पहले Court ने राज्य सरकार से याचिका में उठाए गए मुद्दों पर जानकारी मांगी थी!

25 July 2017 को माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने न्यायालय को जो जानकारी उपलब्ध कराई उससे स्पष्ट हो रहा है कि अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 के उपबन्धों पर बिना विचार किए ही परिपत्र व शासनादेश जारी किए गए है! Supreme Court ने अनिवार्य शिक्षा कानून को पुरे देश में बाध्यकारी घोषित किया है! Court ने याचिका में उठाए गए मुद्दों को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार से बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है और शासनादेश पर रोक लगा दी है!

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