SSC CGL TIER 1 Rashtriya Aay National Income Study Material in Hindi

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 राष्ट्रीय आय National Income (Rashtriya Aay National Income Study Material in Hindi)

राष्ट्रीय आय से आंशय किसी देश में एक वर्ष के मध्य में उत्पादित सभी वस्तुओं एवं सेवाओं के बाजार मुल्य के योग से है, जिसमें ह्रास घटाकर व विदेशी लाभ जोड़कर निकाला जाता है। वर्तमान में भारत सरकार का केन्द्रीय संख्यिकी संगठन ( CSO) भारत की राष्ट्रीय आय की गणना करता है।

राष्टीय आय सादन लागत पर आकलित विवल राष्ट्रिय उत्पाद है।

साइमन कुजनेट्स जो राष्ट्रिय़ आय लेखांकन (National Income Accounting)  के जन्मदाता है।

इन्होने राष्ट्रीय आय के मापन की तीन पद्धति प्रस्तुत की है, जो निम्नलिखित है

उत्पाद पद्धति (Rashtriya Aay National Income Study Material in Hindi)

कुजनेट्स ने इस विधि को वस्तु सेवा विधि के नाम से परिभाषित किया है। इस पद्धति के अन्तर्गत देश में एक वर्ष में उत्पादित अन्तिम वस्तुओं तथा सेवाओं का शुद्ध मूल्य ज्ञात किया जाता है तथा उसके योग को अन्तिम उपज योग ( Final Product Total)  कहा जाता है।

आय पद्धति(Rashtriya Aay National Income Study Material in Hindi)

इस पद्धति के अन्तर्गत राष्टीय आय की गणना के लिए विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत व्यक्तियों तथा व्यावसायिक उपक्रमों की शुद्ध आय का योग प्राप्त किया जाता है।

डॉ. बाउले तथा रॉबर्टसन के अनुसार, आय गणना विधि के अन्तर्गत आयकर देने वाले तथा आयकर न देने वाले समस्त व्यक्तियों की आय को जोड़ दिया जाता है।

व्यय पद्धति

इस विधि को उपभोग बचत विधि भी कहते है। इस विधि के अनुसार कुल आय या तो उपभोग पर व्यय की जाती है अथवा बचत पर, अत: राष्ट्रीय आय कुल उपभोग तथा कुल बचतों का योग होती है। इस विधि की गणना, करने के लए उपभोक्ताओं की आय तथा उनकी बचत से सम्बन्धित आँकड़ो का उपलब्ध होना आवश्यक होता है।

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चुँकि इस प्रकार के सही आँकड़े आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते, अत: इस विधि का प्रयोग सामान्यत: कम किया जाता है। भारत जैसे देश में राष्ट्रीय आय की गणना के लिए उत्पादन प्रणाली (Production Method) तथा आय प्रणाली (Income Method) का सम्मिश्रण प्रयोग किया जाता है।

हरित सूचकांक

जब एक वर्ष में वस्तुओं एवं सेवाओं के शुद्ध उत्पाद के योग में उत्पादन की प्रक्रिया में देश के पर्यावरम और परिस्थितिकी को जो हानि पहुँचाती है, उसके मौद्रिक मूल्य को कम कर दिया जाता है, तो उसे हरित राष्ट्रीय आय कहा जाता है।

विश्व बैंक ने देश की सम्पत्ति के आकलन के लिए 1995 में एक नया सूचकाक विकसित किया है।

इसके अन्तर्गत निन्मलिखित तीन अंगों को शामिल किया गया है, जिसके आदार पर प्रति व्यक्ति आय की गणना होती है

  1. उत्पादित सम्पति
  2. प्राकृतिक सम्पदा
  3. मानव संसाधन

किसी देस की राष्ट्रीय आय निम्न पाँच प्रकारों से प्रकट की जाती है

  1. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश की घरेलू सीमा के अन्तर्गत एक वर्ष में उत्पादित सभी अन्तिम वस्तुओं और सेवों के मौद्रिक मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद कहते है। इसमें विदेशयों द्वारा देश में अर्जित आय शामिल होती है किन्तु विदेशों में बसे भारतीयों द्वारा भेजी आय को शामिल नहीं किय़ा  जाता
  2. सकल राष्ट्रीय उत्पात (GNP) किसी  देस के द्वारा एक वर्ष में उत्पादित अन्तिम वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को सकल राष्ट्रीय उत्पाद कहते है। यह बन्द अर्धव्यवस्था की अवधारणा है, जिसमें अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को सम्मिलित नही किया जाता। व्यय विधि के माध्यम से (GNP)  में मूल्य ह्रास व्यय शामिल नही किया जात है
  3. शुद्ध राष्ट्रय उत्पाद (NNP)सकल राषट्रीय उत्पाद में प्रयुक्त मशीनो और पूँजी की गिरावट (ह्रास) को घटा दिया जाता है, तब इस शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद कहते है.
  4. व्यक्तिगत आय यह वह आय है जो वास्तव में देश की जनता द्वार एक वित्तीय वर्ष में प्राप्त की जाती है।

इसकी गणना निम्न प्रकार की जाती है

व्यक्तिगत आय = राष्ट्रीय आय – निगम व कम्पनियों पर कर + कम्पनी के अवितरित लाभ + प्रॉविडेण्ट फण्ड में अंशदान –(सरकार द्वारा सामाजिक सुधार पर व्यय)

5.व्यय योग्य आय जनता के पास वह शुद्ध आय जिसे जनता व्यय करने को तत्पर है, व्यय योग्य आय कहलाती है।

ऐसी आय की गणना हैतु व्यक्तिगत आय में से व्यक्तिगत प्रत्यक्ष करो को घटा दिया जाता है भारत की राषट्रीय आय एवं प्रति व्यक्ति आय की गणना का प्रथम प्रयास दादाभाई नौरोजी ने सन् 1867-68 में किया था।

सुत्र

राजस्व घाटा = राजस्व व्यय- राजस्व प्राप्तियाँ

पूँजी घाटा = पूँजीगत व्यय – पूँजीगत प्राप्तियाँ

बजट घाटा = कुल व्य – कुल प्राप्तियाँ / राजस्व घाटा + पूँजीगत घाटा

राजकोषीय घाटा = बजट + उधार व अन्य देयताएँ

प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा – ब्याज अदायगियाँ

 
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