SSC CGL TIER 1 Radioactivity Study Material In Hindi

SSC CGL TIER 1 Radioactivity Study Material In Hindi

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रेडियोऐक्टिवता Radioactivity 

SSC CGL TIER 1 Radioactivity Study Material In Hindi

SSC CGL TIER 1 Radioactivity Study Material In Hindi

  • रेडियोऐक्टिवता की खोज हेनरी बेकुरल (Henery Becquerel) ने की थी, परन्तु शब्द रेडियोऐक्टिवता मैडम क्यूरी ने दिया था।
  • रेडियोसक्रियता की खोज फ्रेंच वैज्ञानिक हेनरी बेकुरल, एम क्यूरी तथा पी क्यूरी ने की। इस खोज के लिए इन तीनों को संयुक्त रुप से नोबेल पुरस्कार मिला।
  • यह वह प्रक्रम है अत: स्वत: विद्यटित होता है। इसे गाइगर काउंटर की सहायता से मापा जाता है।
  • यह एक नाभिकीय प्रक्रम है अत: बाह्रा कारकों; जैसे— ताप, दाब आदि से अप्रभावित रहता है।
  • इसमें α,β तथा γ- किरणें/कण उत्सर्जित होती हैं।
  • इसकी इकाई क्यूरी, बेकुरल, रदरफोर्ड आदि हैं।
  • रेडियो सक्रिय तत्व प्रकृति में पाए जाने वाले वे तत्व हैं जो स्वत: विखण्डित होकर कुछ अदृश्य किरणों का उत्सर्जन करते हैं।
  • राबर्ट पियरे एवं उनकी पत्नी मैडम क्यूरी ने नये रेडियोसक्रिय तत्व रेडियम की खोज की।
  • सभी प्राकृतिक रेडियोसक्रिय तत्व α,β एवं γ- किरणों के उत्सर्जन के बाद अन्तत: सीसे में बदले जाते हैं।
  • वर्तमान में लगभग 40 प्राकृतिक रेडियो सक्रिय समस्थानिक एवं अनेक रेडियो सक्रिय तत्व ज्ञात हैं।

रेडियो सक्रिय तत्वों के प्रकार

  • प्राकृतिक— यूरेनियम, रेडियम
  • कृत्रिम— मैग्नीशियम

Alpha Particles For SSC CGL TIER 1

एल्फा (α) कण

  • ये धनावेशित हीलियम नाभिक (2He4) हैं।
  • इस पर +2 इकाई आवेश तथा 4u द्रव्यमान होता है।
  • जब α-कण उत्सर्जित होता है, तो प्राप्त नया नाभिक आवर्त सारणी में, मूल नाभिक के दो स्थान बाईं ओ स्थित होता है (सोडी फायान्स समूह विस्थापन नियम)।
  • एल्फा कण अत्यन्त तीव्र वेग से रेडियो सक्रिय तत्वों के नाभिक से बाहर निकलते हैं। इसका वेग प्रकाश के वेग का लगभग 1/10 भाग होता है। यह जीव कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। अधिक द्रव्यमान होने के कारण इन किरणों की वेधन क्षमता कम होती है। α-किरण फोटोग्राफिक प्लेट को प्रभावित करती हैं तथा जिंक सल्फाइड या बेरियम प्लैटिनोसायनाइड में स्फुटदीप्ति उत्पन्न करती है।

Beta Particles Study Material In Hindi 

बीटा (β) कण

  • ये ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन (-1e0) हैं।
  • ये -1 इकाई आवेश तथा शून्य द्रव्यमान रखते हैं।
  • α-किरणों की अपेक्षा ये अधिक हानिकारक होते हैं।
  • इसकी भेदन क्षमता, α-किरणों से अधिक होती है।
  • इसकी आयनन क्षमता तथा गतिज ऊर्जा, α-कणों की अपेक्षा कम होती है।
  • इन कणों का वेग प्रकाश के वेग का लगभग 9/10 वाँ भाग होता है अर्थात् इनका वेग α-कण के वेग का नौ-गुना होता है।
  • जब कण उत्सर्जित होता है, तो प्राप्त नया नाभिक, आवर्त सारणी में, मूल नाभिक के एक स्थान दाईं ओर स्थित होता है। (सोडी फायान्स समूह विस्थापन नियम)

Gamma Rays For SSC CGL TIER 1 

गामा (γ) किरणें

  • ये विद्युत चुम्बकीय विकिरण हैं।
  • इनकी भेदन क्षमता उच्च होती है।
  • इनकी आयनन क्षमता तथा गतिज ऊर्जा निम्न होती है।
  • उत्सर्जित होने पर, ये नाभिक की आवर्त सारणी में स्थिति को प्रभावित नहीं करती हैं।
  • ये किरणें विद्युत उदासीन होती हैं इस कारण विद्युत क्षेत्र से होकर गमन करते समय ये विचलित नहीं होती हैं।
  • इनका वेग, प्रकाश के वेग के बराबर होता है।
  • निकलने वाले α-कणों की संख्या = द्रव्यमान संख्या में परिवर्तन/4
  • निकलने वाले β-कणों की संख्या = 2 X α — (परमाणु क्रमांक में परिवर्तन)
  • एक α-कण का उत्सर्जन होने पर, परमाणु क्रमांक में 2 इकाई तथा द्रव्यमान संख्या में 4 इकाई की कमी होती है। एक β-कण का उत्सर्जन होने पर, परमाणु क्रमांक 1 इकाई बढ़ जाता है जबकि द्रव्यमान संख्या अपरिवर्तित रहती है।
  • नाभिकीय अभिक्रियाओं में, अभिकारकों का परमाणु क्रंमाक = उत्पादों की द्रव्यमान संख्या

Half-Life Period For SSC CGL TIER 1 

अर्द्ध-आयुकाल

वह समय, जिसमें कोई भी रेडियोऐक्टिव पदार्थ अपनी मूल मात्रा का आधा रह जाता है, उसका अर्द्ध-आयुकाल कहलाता है।

SSC CGL Study Material Sample Model Solved Practice Question Paper with Answers

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