SSC CGL TIER 1 Kendra Rajya Sambandh Study Material in Hindi

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केन्द्र राज्य सम्बन्ध(Kendra Rajya Sambandh Study Material in Hindi)

  • भारत में केन्द्र- राज्य सम्बन्ध संघवाद की और उन्मुख है और संघवाद की इस प्रणाली को कनाडा के संविधान से लिया गया।
  • राज्य की शक्तियों के बँटवारे से सम्बन्धी तीन सूचियाँ है, जिनका उल्लेख संविधान की सातवीं अनुसूची में है
  1. संघ सूची
  2. राज्य सूची
  3. समवर्ती सूची

संघ के प्रमुख राजस्व स्त्रोत(Kendra Rajya Sambandh Study Material in Hindi)

:- निगम कर, सीमा शुल्क, निर्यात शुल्क, कृषि भूमि को छोड़कर अन्य पर सम्पदा शुल्क, विदेशी ऋण, रेल, रिजर्व बैंक, शेयर बाजार इत्यादि।

राज्य के प्रमुख राजस्व स्त्रोत:- व्यक्ति कर, कृषि भूमि पर कर, पशुओं तथा नौकायान चपर कर, विक्रय कर, वाहनों पर चुंगी, केन्द्र राज्य सम्बन्धों को सुधारने हेतु इन्टर स्टेट काउन्सिल, जोनल काउन्सिल, नार्थ- ईस्टर्न काउन्सिल आदि का गठन किया गया है।

केन्द्र – राज्यो सम्बन्धों पर सरकारिय3 आयोग का गठन, जून, 1983 में किया गया। इसने अपनी रिपोर्ट, जनबरी, 1988 में सौपी। एम. एम. पुँछी आयोग का गठन, अप्रैल, 2007 में किया गया, जिसने 2010 में अपनी रिपोर्ट सौपीं।

राजभाषा

संविधान के भाग -17 के अनुच्छेद 343 के अनुसार , संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी है। संविदान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं का राजभाषा के रुप में मान्यता प्राप्त है।

पंचायती राज

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73 वें एवं 74 वें संविधान  संशोधन 1993 के तहत स्थानीय शासन, भारतीय परिसंघीय व्यवस्था में तीसरे स्तर की सरकार को सामने ला खडा किया पंचायती राज के लिए वर्ष 1956 मे बलवन्त राय मेहता समिति ने सिफारिश की तथा इसे सभी मे क्रियान्वत करने के लिए कहा गया ।

पेंचायती राज का पदसोपन(Kendra Rajya Sambandh Study Material in Hindi)

  • जिला-परिषद् में आता है पंचायत समिति और इसके आन्दर आता है ग्राम पंचायत और ग्राम पंचायत में ग्राम सभा, पंचायत ग्राम कचहरी आते है
  • सर्वप्रथम राजस्थान के नागौर जिले में 2 अक्टूबर , 1959 को पण्डित जवाहरलाल नेहरु ने पंचायती राज की नीव रखी और उसी दिन इसे सम्पूर्ण राज्य में लागू कर दिया ।
  • वर्तमान में इस अधिनियम के तहत पूरे भारत में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को अपनाया गया सिवाय पश्चिम बंग के जिसमें चार स्तरीय पंचायती व्यवस्था को अपनाया गया है।
  • पंचायती राज के सम्बन्ध में भारतीय सविधान का अनुच्छेद 243 से 243 (ण) विशेष उल्लेख करता है।

नगरों में स्थानीय शासन(Kendra Rajya Sambandh Study Material in Hindi)

  • 74 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा नगरों म स्थानीय स्वशासी सस्थाओं की स्थापना, उनकी शक्तियों तथा कार्योके सम्बन्ध में वैधानिक प्रावधान किए गए।
  • इस संशोधन द्वारा संविधान में एक नया भाग 9 क  जोड़ा गा तथा इसके अन्तर्दत अनुच्छेद 243 त से 243 य छ समाविषिट किया गया तथा 12वी अनुसूची जोडी गई।

महत्वपूर्ण तथ्य

इस संशोधन द्वारा निम्न तीन प्रकार के नगरीय निकायों (जनसंख्या के आधार पर ) की स्थापना हेतु प्रावधान किए गए

  • ग्रामीण क्षेत्रसे नगरीय क्षेत्र में संक्रमणशील क्षेत्र के लिए नगर पंचायत साधारणतया 10000 से 20000 की जनसंख्या के लिए
  • छोटे नगरीय क्षेत्र के लिए नगर परिषद्- साधारणतया 20000 से 3 लाख की जनसंख्या के लिए
  • बड़े नगरीय क्षेत्रके लिए नगर निगम, – साधारणतया 3 लाख से अधिक की जनसंख्या के लिए
  • परन्तु किसी ऐसे क्षेत्र में नगरपालिका की स्थापना नही हो सकती जो किसी औद्दोगिक संस्थान के क्षेत्र में आता हो तथा जहाँ या तो उस संस्थान ने नगरपालिका सेवाएँ उपलब्ध कराई है अथवा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

आपात उपबन्ध

भारतीय संविधान में तीन प्रकार के आपात काल की व्यवस्था है

  • राष्ट्रीय आपात (अनुच्छेद 352)
  • राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356)
  • वित्तीय आपात (अनुच्छेद 360)

राष्ट्रीय आपात  इसकी घोषणा निम्न में से किसी भी आधार पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। 1. युद्ध 2. बाह्रा आक्रमण 3. सशस्त्र विद्रोह 44वे संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 352 के अधीन उद्घोषणा सम्पूर्ण भारत में या उसके किसी भाग में का जा चसकती है।

राज्य में राष्ट्रपति शासन  किसी राज्य में यह समाधान हो जाने पर कि राज्य में सांविधानिक तन्तर विफल हो गया है अथवा राज्य संघ की कार्यपालिका के किन्ही निर्दोशों का अनुपालन करने मैं असमर्थ होता है, तो संघ राज्य प्रशासन के कार्य अपने हाथ में ले लेता है।

वित्तीय आपात  राष्ट्रपति को जब यह विश्वास हो जाए कि ऐसी स्थिति विद्दमान है, जिसके कारण भारत के वित्तीय स्थायित्व या साख को खतरा है।

संविधान संशोधन की प्रक्रिया (अनुच्छेद 368)

  • संविधान के कुछ प्रावधानों को संसद साधारण बहुमत द्वारा संशोधित कर सकती है।
  • संविधान के कुछ प्रावधानों को संसद 2/3 बहुमत से संशोधित कर सकती है तथा नका अनुमोदन अधिकाश राज्यों की विधानसभाओं द्वारा स्वीकृत किया जा सकता है।
  • संविधान के अधिकाश भागों में संशोधन 2/3 बह7मत से किया जा सकता है। यह स्पष्ट कर देना आवश्यक हे कि यह हो तिहाई बहुमत प्रत्येक सदन के कुल सदस्य संख्या का स्पष्ट बहुमत होना चाहिए।

 
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