SSC CGL TIER 1 Indian Tax Structure GST Study Material in Hindi

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भारतीय कर ढाँचा Indian Tax Structure (Indian Tax Structure GST Study Material in Hindi)

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भारत राज्यों का समूह है अर्थात भारत एक संघात्मक देस है इसलिए भरतीय संविधान के अनुसार यहाँ तीन स्तरों पर कर का संग्रहण किया जा सकता है।

  1. केन्द्र सरकार
  2. राज्य सरकार
  3. स्थानीय सरकार

भारत में कर ढाँचे का स्वरुप

करों के दे प्राकार प्रत्यक्ष कर एवं अप्रत्यक्ष कर होते है।

प्रत्यक्ष कर (Indian Tax Structure GST Study Material in Hindi)

यह वह कर हे जिसे व्यकति या संस्था पर लगाया जाता है वह कर आदा करता है। प्रत्यक्ष कर के बोझ को स्थानान्तरित नही  किया जा सकता है। इसमें करारोपण प्रणाली सरल होती है थथा इसका पूर्वानुमान भी सरल होता है आयकर, सम्पत्ति कर , निगम कर ब्याज कर, उपहार कर आदि प्रत्यक्ष कर के उदाहसण है।

केन्द सरकार के प्रत्यक्ष कर

  • धन कर
  • निगम कर
  • आयकर
  • एस्टेट ड्यूटी
  • व्यय कर
  • ब्याज कर

राज्य सरकारों के प्रत्यक्ष कर

  • भू-राजस्व
  • व्यवसाय कर
  • कृषि आय पर कर
  • होटल प्राप्तियों पर कर
  • रोजरगारों पर कर
  • गैर- शहरी अथवा सम्पत्तियों पर कर

अप्रत्य़क्ष कर

वस्तुओं एवं सेवाओं पर लागाया जाता है इसमें कर के बोझ को स्तानान्तरित किया जाना सम्भव होता है।इसिमें करारोपण की प्रणाली कठिन होती है इसका अनुमान लगाना भी कठिन होता है।

अप्रत्यक्ष कर के कारण ही वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य में वृद्धि होती है। अप्रत्यक्ष करों में मुख्य हैं – उत्पाद शुल्क तथा बिक्री कर

केन्द्र सरकार के अप्रत्यक्ष कर

  • वस्तु एं सेवा कर
  • सेवाकर
  • केन्द्रीय उत्पाद शुल्क
  • सीमा शुल्क
  • व्यय कर
  • बिक्री कर
  • राज्य सरकाकारो के अप्रत्यक्ष कर
  • व्यापार कर
  • डीजल/पेट्रोल पर बिक्री कर
  • प्रवेश कर
  • विद्दुत कर
  • स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क
  • सट्टेबाजी पर कर
  • राज्य उत्पाद शुल्क
  • वाहन कर
  • विज्ञापन कर
  • परिवहन कर
  • शिक्षा उपकर
  • कच्चे जूट पर कर
  • भारत में केन्द्र सरकार के राजस्व का प्रमुख स्त्रोत केन्द्रीय उत्पाद शुल्क तथा राज्य सरकार के राजस्व का प्रमुख स्त्रोत बिक्री कर है।

मुद्रा एवं बैकिंग Money and Banking (Indian Tax Structure GST Study Material in Hindi)

मुद्रा का अर्थ

मुद्रा बह शक्तिशाली वस्तु है जो सभी प्राकर के लेन देन में भुगतान के माध्यम के रुप में सभी को स्वीकार्य होती है, अर्थात मुद्रा का अर्थ केवल कागज के नोट या सिक्के नही हैं जिनका निर्गमन केन्द्रीय बैंक तथा सरकार करती है, बल्कि वे सभी वस्तुएँ इसके अन्तर्गत आती है, जो भुगतान के रुप में सामान्यत: स्वीकार की जाती है। उदाहारणस्वरुप यदि आप बाजार से रु 25 हजार का टी. वी. लाते है, तो इसका भुगता न आप कई तरीको से कर सकते है, जैसे- चेक, क्रेडिट कार्ड या ड्राफ्ट आदि ये सभी मुद्रा दो प्रकार की होती है

  1. वैधानिक मुद्रा वह है जिसका निर्गमन सरकार या रिजर्व बैंक धारक को उतनी रकम अदा करने का वचन देता है।
  2. साख मुद्रा वह है, जो आप चेकों के माध्यम से कहीं भुगतान करते है।

मुद्रा की तरलता

मुद्रा की तरलता ही इसकी सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता होती है। तरलता से हमारा आशय मुद्रा की किसी वस्तु में परिवर्तनीयता से है। आपके द्वारा मुद्रा में किया गया भुगतान बिना किसी क्षति के वस्तु या सेवा में परिवर्तित हो जाता है। दूसरे शब्दो, मुद्रा वह माध्यम है, रजो बिना किसी ह्रास के किसी भी वस्तु का स्वरुप धारण कर सकती है।

भारतीय मुद्रा बाजार

  • मुद्रा बाजार एक नियर मनी (Near Money) के रुप में सुलभ बाजार होता है, जिसमे अल्प समय के लिए फण्ड उधार लिए व दिए जाते है।
  • भारतीय मुद्रा बाजार को रिजर्व बैक ऑफ इण्डिया अभिनियमित करता है।

मुद्रा बाजार के साधन

  1. 91 दिन के ट्रैजरी बिल इन बिलो  का प्रयोग अल्प समय के लिए बाजार में फण्डों को बढाने के लिए किया जाता है।
  2. 182 दिन के टैजरी बिल ये बिल बाजार की स्थिति के अनुसार जारी किए जाते है इस बिलों को जारी करने की अनुशंसा सर्वप्रथम वाघुल वर्किग ग्रुप की थी।
  3. 364 दिन के ट्रैजरी बिल ये बाजार को स्थिरता प्रदान करने के लिए जारी किए जाते है।
  4. 14 दिन के ट्रैजरी बिल ये सर्वप्रथम सन् 1997 में जारी किए गए थे
  5. जमा प्रमाण-पत्र ये वाणिज्यिक बैंकों द्वारा जारी किए जाते है। ये एक निश्चित अवधि के लिए सावधि जमा के स्वामित्व को प्रदर्शित करते है.
  6. वाणिज्यिक पत्र यह 7 से 90 दिनों के लिए जारी किया जाता है। इसकी शुरुआत भारत में सर्वप्रथम 27 मार्च, 1989 को की गई थी ये कम्पनियों द्वारा जारी किए जाते है।

भारतीय पूँजी बाजार

भारतीय पूँजी बाजार को मुख्य रुप से दो भागों में बाँटा जाता है

  1. गिल्ट एण्ड बाजार
  2. औद्दोगिक प्रतिभूति बाजार
  • पूँजी बाजार में लम्बी अवधि के उधार लिए व दिए जाते है
  • गिल्ट एण्ड बाजार में रिजर्व बैंक के माध्यम से सरकारी व अर्द्ध सरकारी प्रतिभूतियों का क्रय- विक्रया किया जाता है।
  • औद्दोगिक प्रतिभूति बाजार में नये स्थापित होने वाले या पहले से स्थापित औद्दोगिक उपक्रमों के शेयरों व डिबेन्चरों का क्रय- विक्रय किया जाता है

भारतीय शेयर बाजार(Indian Tax Structure GST Study Material in Hindi)

  • शेयरों एवं अंश – पत्रों का क्रय- विक्रय जिस बाजार में होता है, उसे शेयर बाजार कहते है।
  • बॉम्बे स्टॉक एक्सचेन्ज (BSE), एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेन्ज है। इसकी स्थापना सन् 1875 में की गई थी।
  • राष्ट्रीय शेयर बाजार (NSE) की स्थापना फेरवानी समिति की अनुशंसा पर की गई थी इसकी प्रारम्भि पूँजी रु 25 करोड़ थी।
  • मुम्बई स्टॉक एक्सचेन्ज को पब्लिक लिमिटेड कम्पनी का दर्जा 19 अगस्त, 2005 को दिया गया ।
  • राष्ट्रीय शेयर बाजार का मुख्यालय (वर्ली) मुम्बई में है।
  • मिबोर (MIBOR) एवं मिबिड (MIBID) राष्ट्रीय शेयर बाजार की दो रिफरेन्स दरें है।
  • भारत में 23 मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेन्ज हैं।

भारत  के चार कॉमोडिटी एक्सचेन्ज निम्नलिखित है

  1. मल्टी कॉमोडिटी एक्सचेन्ज (मुम्बई)
  2. नेशनल कॉमोडिटी एण्ड डेरीइवेटिव्स एक्सचेन्ज (मुम्बई)
  3. नेशनल मल्टी कॉमोडिटी एक्सचेन्ज (अहमदाबाद)
  4. इण्डिया कॉमोडिटी एक्सचेन्ज (गुड़गाँव)

 
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