SSC CGL TIER 1 Chemical Bond Study Material In Hindi

SSC CGL TIER 1 Chemical Bond Study Material In Hindi

SSC CGL TIER 1 Chemical Bond Study Material In Hindi

रासायनिक बन्ध

SSC CGL TIER 1 Chemical Bond Study Material In Hindi

SSC CGL TIER 1 Chemical Bond Study Material In Hindi

  • किसी अणु में उपस्थित अवयवी परमाणुओं को परस्पर बाँधकर अणु को विशेष ज्यामितीय आकार में रखने वाले बल को रासायनिक बन्ध कहते हैं।
  • इनका निर्माण, तत्वों द्वार, अपने बाह्रा कक्ष में आठ इलेक्ट्रॉन पूरे करने के लिए किया जाता है। (अष्टक नियम)

Valency For SSC CGL TIER 1

संयोजकता

  • संयोजकता, इलेक्ट्रॉनों की वह संख्या है जो बन्ध बनाने में भाग लेती है, इन्हें संयोजी इलेक्ट्रॉन भी कहते हैं।
  • आयनिक या विद्युत संयोजक यौगिकों में, यह विद्युत संयोजकता (Electrovalency) कहलाती है तथा सहसंयोजक यौगिकों में यह सहसंयोजकता (Covalency) कहलाती है।
  • सामान्यत: आवर्त में संयोजकता हाइड्रोजन के सापेक्ष 1 से 7 तक बढ़ती है जबकि ऑक्सीजन के सापेक्ष पहले 1 से 4 तक बढ़ती है तथा फिर 1 तक घटती है।
  • यह क्षार धातुओं (जैसे सोडियम, पोटैशियम आदि) के लिए 1, क्षारीय मृदा धातुओं (जैसे-मैग्नीशियम, कैल्सियम आदि) के लिए 2, एल्युमीनियम के लिए 3 तथा नाइट्रोजन के लिए -3 से +5 तक होती है।
  • संक्रमण धातुओं के लिए संयोजकता परिवर्ती (Variable) होती है क्योंकि (n-1)d तथा ns कक्षकों की ऊर्जा में बहुत कम अन्तर होता है।

उदाहरण— Fe (+2,+3), Cu (+1,+2), Hg (+1,+2)।

  • p-ब्लॉक के भारी तत्वों के लिए भी अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण यह परिवर्ती (Variable) होती है।

Ions Study Material In Hindi

आयन

  • विद्युत आवेश युक्त परमाणुओं के समूह को आयन कहते हैं।

ये दो प्रकार के होते हैं धनायन, ऋणायन।

  • धनायन इलेक्ट्रॉनों की हानि से बनते हैं; जैसे—Na+, Mg2+ आदि तथा ऋणायन इलेक्ट्रॉनों के लाभ से बनते हैं; जैसे—Cl,F आदि।

Electrovalent Bond Or Ionic Bond For SSC CGL TIER 1

विद्युत संयोजक बन्ध या आयनिक बन्ध

  • जब एक परमाणु से दूसरे परमाणु में इलेक्ट्रॉनों के स्थानान्तरित होने से उन दोनों परमाणुओं के बीच बन्ध बनता है, तो उसे विद्युत संयोजक बन्ध कहते हैं।
  • यह विपरीत आवेशित आयनों के मध्य लगने वाला विद्युतस्थैतिक आकर्षण (Electrostatic attraction) है।
विद्युत संयोजक बन्ध

विद्युत संयोजक बन्ध

विद्युत संयोजकों के गुण

  • ये यौगिकों गलित अवस्था तथा जलीय विलयन में विद्युत का चालन कर सकते हैं परन्तु ठोस अवस्था में ये विद्युत के अचालक (Non-conductor) होते हैं। ठोस अवस्था में आयनिक यौगिकों के अवयवी आयनों के बीच मजबूत आकर्षण बल कार्यरत रहने के कारण इनके आयन एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर गमन नहीं कर सकते हैं इस कारण ठोस अवस्था में ये यौगिक विद्युत के कुचालक होते हैं।
  • विद्युत संयोजक या आयनिक यौगिकों के गलनांक उच्च होते हैं तथा ये जल में विलेय होते हैं।
  • विद्युत संयोजक यौगिक की अभिक्रियाएँ आयनिक प्रकृति की और प्राय: तीव्र गति वाली होती हैं।

उदाहरण— चूना पत्थर (CaCo3),  नमक (NaCl), चूना (CaO), मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) आदि।

  • विद्युत संयोजक यौगिकों के आयनों को अनन्त दूरी तक पृथक करने के लिए आवश्यक ऊर्जा जालक ऊर्जा कहलाती है।

Covalent Bond For SSC CGL TIER 1

सहसंयोजक बन्ध

  • यह बन्ध परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी द्वारा बनता है।
  • जब समान विद्युत ऋणात्मकताओं वाले परमाणुओं के मध्य बनता है, तो वह अध्रुवीय सहसंयोजक बन्ध (Non-polar covalent bond) कहलाता है।

उदाहरण— नाइट्रोजन, क्लोरीन, ऑक्सीजन, फ्लुओरीन आदि।

सहसंयोजक बन्ध

सहसंयोजक बन्ध

  • सहसंयोजक बन्ध, एकल बन्ध (जो दो इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी द्वारा बनता है अर्थात् बन्ध बनाने में प्रत्येक परमाणु का एक इलेक्ट्रॉन प्रयुक्त होता है), द्वीबन्ध (जो चार इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी द्वारा बनता है अर्थात् बन्ध बनाने में प्रत्येक परमाणु के दो इलेक्ट्रॉन प्रयुक्त होते हैं) तथा त्रिबन्ध (जो छ: इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी द्वारा बनता है) हो सकता है।

सहसंयोजक बन्ध युक्त यौगिक निम्न गुण दर्शाते हैं

  • ये विद्युत के कुचालक होते है, इनका क्वथनांक व गलनांक कम होता है। ग्रेफाइट व हीरे (डायमण्ड) का गलनांक उच्चतम होता हैं।
  • ये जल में अविलेय (Insoluble) तथा कार्बनिक विलायकों; जैसे—बेन्जीन, ऐसीटोन, ईथर आदि में विलेय होते हैं।

Hydrogen Bond Study Material In Hindi

हाइड्रोजन बन्ध

  • एक हाइड्रोजन परमाणु तथा एक विद्युतऋणात्मक परमाणु; जैसे नाइट्रोजन, ऑक्सीजन या फ्लुओरीन (जो किसी अन्य या समूह से प्राप्त होता है) के बीच लगने वाला आकर्षण बल हाइड्रोजन बन्ध कहलाता है।
  • हाइड्रोजन बन्ध ऊर्जा 5 से 30 किलोजूल/मोल होती है।
  • यह अकार्बनिक अणुओं; जैसे जल तथा कार्बनिक अणुओं; जैसे डी.एन.ए (DNA) में उपस्थित होता है।

यह दो प्रकार का हो सकता है

  1. अन्तराअणुक H-बन्ध (Intermolecular H-Bond) इस बन्ध के बनने के परिणामस्वरुप, अणु का क्वथनांक व जल में विलेयता बढ़ जाती है।
  2. अन्तरअणुक H-बन्ध (Intramolecular H-Bond) इस बन्ध बनने पर अणु का क्वथनांक व जल में विलेयता कम हो जाती है।
  • ग्रेफाइट में सहसंयोजक बन्ध उपस्थित होते हैं फिर भी यह विद्युत का अच्छा चालक है।
  • एथेनॉल, ऐमीन (30 ऐमीन को छोड़कर) आदि सहसंयोजक यौगिक हैं फिर भी ये जल में विलेय होते हैं क्योंकि ये जल के साथ H-बन्ध बना सकते हैं।
  • H2O की संरचना कोणीय होती है, NH3 (अमोनिया) की संरचना पिरैमिडी होती है। मेथेन (CH4) की संरचना चतुष्फलकीय होती है तथा कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की संरचना रैखिक होती है।
  • एकल बन्ध में केवल σ-बन्ध होता है। द्वीबन्ध में एक σ-तथा एक π-बन्ध होता है। त्रि-बन्ध में एक σ- तथा दो π-बन्ध होते हैं।

SSC CGL Study Material Sample Model Solved Practice Question Paper with Answers

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