CTET UPTET Uplabdhi ka Mulyakan Evolution of Achievement Study Material in Hindi

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उपलब्धि का मूलांकन एवं प्रश्नोम का निर्माण Evolution of Achievement and Formation Questions

उपलब्धि का मूल्यांकन(Uplabdhi ka Mulyakan Evolution of Achievement Study Material in Hindi)

छात्र की उपलब्धि का मूल्यांकन सतत् एवं व्यापक रुप से होते रहना चाहिए। इसके लिए की विधियों को अपनाया जाता है, किन्तु ग्रेडिंग पद्धति का प्रयोग इस कार्य हेतु बेहतर होता है। विभिन्न क्षेत्रों में विद्दार्थियों की उपलब्धियों की रिपोर्ट तैयार करते समय समग्र ज्ञान में अप्रत्यक्ष ग्रेडिंग के पाँच बिन्दुओं का प्रगोग किया जा सकता है। इन ग्रेडों में अंको का वितरण इस प्रकार किया जाना चाहिए

ए+

बी

सी

डी

सर्वोत्कृष्ट

उत्कृष्ट

बहुत अच्छा

अच्छा

औसत

90% – 100%

75% – 89%

56% – 74%

35% – 55%

35% से कम

बच्चे का ग्रेड उपलब्धि कार्ड में दर्शाया जाना चाहिए, जो प्रतिशतता की उपरोक्त श्रेणी में व्यवहार के सूचक के अनुसार प्रतिशतता पर आधारित हो इसके अलावा, शैक्षिक और सम्बन्ध में कुछ टिप्पणियाँ दर्ज की जा सकती है। ये टिप्पणियाँ शिक्षण के क्षेत्र में प्रयास करने के लिए माता पिता  और बच्चे के लिए सहायक होती है।

इस प्रकार सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन, सतत् निदान उपचार , प्रोत्साहन और सराहना करके विद्दार्थी की उपलब्धियों में सुधार लाने के लिए उपयोगी सिद्ध होते है। इसके लिए प्रधानाचार्य, अध्यपक और माता पिता को अभिमुखी और ठोस प्रयास करने होगे ताकि बच्चे के व्यक्तित्व का चहुँमुखी विकास हो सके संलग्न रेटिग मान से विभिन्न ग्रेडों के रुप में विद्दार्थियों को उचित रुप से रखने में अध्यापक को मदद मिलती है।

प्रश्नों का निर्माण

बच्चे के ज्ञान सोच छवि और भावनाओं का पता लगाने का सबसे उत्कृष्ट तरीका क्या हैं? शिक्षार्थी का मूल्यांकन उससे प्रश्न पूछकर और उसके सामने समस्याएं रखकर किया जा सकता है। दिए गए उत्तरों के सम्बन्ध में प्रशन बनाने की क्षमता भी शिक्षण का उचित परीक्षण है। सकारात्मक मूल्यांकन करने के रुप में अध्यापक शिक्षण के दौरान उसके शिक्षण की जानकारी या बच्चे  के सामने आने वाली कठिनाइयों को बच्चे से पूछकर कर सकता है कि बच्चा उसके बारे में क्या सोचता है।

अच्छे प्रश्न की विशेषताएँ

उददेश्य पर आधारित प्रश्न पूर्वनिर्धारित उददेश्य पर आधारित होने चाहिए और न्हे इस तरीके से तैयार किया जाना चाहिए और इन्हे इस तरीके से तैयार किया जाना चाहिए कि इससे उददेश्य का प्रभावी परीक्षण हो सके ।

अनुदेश अनुदेश के माध्यम से उसे कार्य विशेष सौपा जाना चाहिए। इस प्रयोजन के लिए समुचित निर्देशात्मक शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए और वाक्य संरचना की स्थिति का उल्लेख किया जाना चाहिए।

विषय- क्षेत्र इसमें उत्तर की सीमा और क्षेत्र (उत्तर की लम्बाई)  का उल्लेख किया जाना चाहिए जो अनुमानित समय और उसक लिए तय अंकों के अनुसार हो

विषय वस्तु प्रश्न उसी विषय क्षेत्र के अन्तर्गत होना चाहिए जिसके सम्बन्ध में परीक्षामण किया जाना है।

प्रश्न का रुप  प्रश्न का रुप उसे उददेश्य और विषय वस्तु पर निर्भर करता है, जिसकी परीक्षा ली जान4 है। कतिपय योग्यताओं की परीक्षा देने के लिए अई तरीके बेहतर होते हैं।

भाषा अच्छा प्रश्न स्पष्ट, संक्षिप्त और दुविधारहित भाषा में तैयार किया जाना चाहिए। इसकी भाषा विद्दार्थी की पहुँच में होनी चाहिए।

कठिनाई का स्तर प्रश्न उस विद्दार्थी को ध्यान में रखते हुए तेयार किया जाना चाहिए जिससे यह प्रश्न पूछा जाना है प्रश्न की कठिनता परीक्षा की क्षमता, परीक्षण कै विषय –क्षेत्र और उत्तर देने के लिए उपलब्ध समय पर निर्भर करती है।

शिक्ति का अन्तर अच्छे प्रश्न में मेधावी विद्दार्थियों और अन्य विद्दार्थियों को भी ध्यान में रखा जाता है।

उत्तर की सीमा का क्षेत्र पुन: निर्धारित करना प्रश्न की भाषा इतनी सटीक और संक्षिप्त होनी चाहिए कि उससे सम्भवित उत्तर की सीमा या परिभाषा स्पष्ट हो सके।

मूल्य बिन्दु पूरे प्रश्न के लिए और उसके उप –भागों के लिए मूल्य बिन्दु या अंकों का स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए।

पूरक प्रकार के प्रश्न

पूरक प्रकार के प्रश्नों में विद्दार्थियों को एक शब्द में या कई वाक्यों अथवा अनुच्छेदों में उत्तर देना होता है। इस प्रकार के प्रश्नों को स्वच्छ उत्तर प्रश्न भी कहा जाता है। पूरक प्रकार के प्रश्नों को चार वर्गों  में विभाजित किया जा सकता है

निबन्ध प्रकार, संक्षप्त उत्तर प्रकार बहुत संक्षपुप्त उत्तर प्रकार और खाली स्थान भरने का प्रकार

निबन्धात्मक प्रश्न निबन्ध प्रार के प्रश्न से आश्य 7है ऐसा लिखित उत्तर जो एक या दो पष्ठों में हो विद्दार्थियों को इस बात की छूट होती है कि वे उत्तर की शब्दावली, उसकी लम्बाई और  उनके संयोजन अपने तरीके से कर सकते है ज्ञान को मापने के लिए प्रयोग किए जाने वाले निबन्ध प्रकार के प्रश्नों में अन्तर किया जाना चाहिए  निबन्ध प्रकार के प्रश्नों का उददेश्य यह है कि बच्चों का भाषाओ में लिखने का परीक्षण किया जाए। इसे निबन्ध परीक्षा कहा जाता है।

पूरक प्रकार के प्रश्न –

1.निबन्ध    2.लघु उत्तर   3.बहुत छोटे उत्तर  4.रिक्त स्थान भरे

ऐसे कई प्रकार की योग्यताएँ हो सकती है, जिनकी अन्य तरीके से नही बल्कि निबन्ध प्रकार के प्रश्न पूछकर ही परीक्षा ली जा सकती है। ये योग्यताएँ इस प्रकार है

  • अर्जित ज्ञान से संगत तथ्य का चयन करना।
  • ज्ञान के विभिन्न पहलुओं के बीच उनकी पहचान करना और उनके आपस का सम्बन्ध निर्धारित करना।
  • एकत्रित की गई सूचना का प्रयोग करके उसके प्रणेण का जायजा लेना।
  • अनुमान लगाकर सूचनाओं को व्यवस्थित करना, उनका विशलेषण करना, तथ्यों की व्याख्या करना औक अन्य प्रकार की सूचनाएँ एकत्र करना।
  • अनुमान लगाकर सूचनाओं को व्यवस्थित करना, उनका विश्लेषण करना, तथ्यों की व्याख्या करना और अन्य प्रकार की सूचनाएँ एकत्र करना
  • दी गई समस्या के बारे में अपने व्यक्तिगत और मूल दृष्टिकोण को व्यक्त करना।
  • तथ्चों, आँकड़ो और उपयुक्त तर्कों से अपने विचारको बनाए रखना।
  • दी गई स्थिति में उपलब्ध सूचना की पर्याप्तता, यथार्थता और सुसंगतता की जाँच करना।
  • समस्या और मुददे के प्रति आन्तरिक अभिवृत्ति का प्रदर्शन करना।
  • स्थूल और सूक्ष्म दोनों स्तरों पर समस्या को समझना
  • दी गई समस्या का समाधान करने के लिए नया दृष्टिकोण बताना, तैयार करना और उसका सुझाव देना।

निबन्धात्मक प्रश्नों को तैयार करना(Uplabdhi ka Mulyakan Evolution of Achievement Study Material in Hindi)

निबन्धात्मक प्रकार के प्रश्नों का आरम्भ सामान्यत: चर्चा, व्याख्या, मूल्यांकन, परिभाषा, तुलनात्मक व  विश्लेषण से होता है। निबन्ध प्रकार के प्रश्न अच्छे होते है जब इनका समूह छोटा व समय सीमा के अन्तर्गत परीक्षा के लिए तैयार किया जाता है। ये लिखित अभिव्यक्ति के लिए भी उचित होते है

कुछ सामान्य प्रश्न इस प्रकार हैं

  • रेतीली मिटट् जल को क्यों नहीं रोकती है? (प्रश्नात्मक)
  • चार ज्ञानेन्द्रियों के नाम बताए एवं उनके चित्र बनाइए? (कथानात्मक)

दूसरे उदाहरण

  1. रुजवेल्ट द्वार 1932 में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव जीतने का कारण बताइए और इस प्रश्न में समावेशन कर से इस प्रकार बनाया जा सकता है
  2. रुजवेल्ट का राष्ट्रपति का चुनाव जीतने का महत्वपूर्ण कारण था हूवर की अलोकप्रियता। क्या आप सहमत है? अपना उत्तर स्पष्ट करें।

इनमें पहला प्रश्न रटे- रटाए उत्तर पर बल देता है, जबकि दूसरा प्रश्न अपेक्षित विचारों, विश्लेषण एवं मूल्यांकन सबको महत्व देता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

निबन्धात्मक प्रश्नों में वस्तुनिष्टता और विश्वसनीयता की कमी होती है। इसलिए निबन्ध प्रकार  के प्रश्नों में संक्षिप्त रसार संक्षेप और स्पष्टता नही होती है लघु प्रश्न उत्तर दो चरम स्थितियों के मध्य मार्ग है। शिक्षक एवं छात्र यदि इनके प्रारुप को भली भाँति समझ ले तो वस्तुनिषठ और निबन्ध दोनों की प्रकार के प्रश्न लाभदायक सिद्ध हो सकते है.

  • संसास के सात अजूबों में से पिरामिड को एक अजूबे के रुप में क्यों माना गया ? (प्रश्नात्मक)।
  • पौधे और जानवरों में चार अन्तर बताइए? (कथनात्मक)।

लघु उत्तीय प्रश्न के सन्दर्भ में निम्नलिखित बातो पर ध्यान देने की आवश्यकता पड़ती है

  • लघु प्रश्नों का प्रयोग वार्षिक/यूनिट परीक्षाओं में किया जा सकता ह3।
  • लगभग सभी वस्तुनिष्ठ अध्ययनों में इसका प्रयोग किया जा सक्ता है।
  • यह छात्रों को सही तथ्यों के अपेक्षा अदिक वस्तुनिष्ठता और विश्वसनीयता होती है ।
  • इस तरह के प्रश्न अधिक से अधिक पाठ्यक्रम को शामिल करने में सहायता करेगे क्योकि कुछ निबन्धात्मक प्रश्नों के स्थान पर अधिक लघु- प्रश्न पूछे जा सकते है । इससे प्रश्न पत्र की वैधता में भी सुधार आएगा।

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न वे है जिनके द्वारा निश्चित परीक्षा बिन्दु जाना जाता है और वस्तुनिष्ठता को चिह्रित किया जा सकता है। इस प्रश्नों से ज्यादातर विषय बस्तु के मूल को समझा जा सकता है और  अधिक विश्वसनीयता व वैधता को बनाया जा सकता है। परीक्षार्थी से शब्द, पदबन्ध अथवा अलंकार और वाक्य पूछकर प्रश्नों के उत्तरों को जाना जा सकता है । इससे उत्तर एक शब्ध या एक वाक्य में दिय3 जा सकता है इनके उत्तर देने में ज्यादा दो मिनट लगेगे और आधा से नम्बर दिया जा सकेगा। अतिलघु प्रश्न उत्तरो का प्रयोग सभी विद्दालयी विषयों में किया जा सकता है।

रिक्त स्थान पूर्ति के प्रश्न  यह भाषा ज्ञान में अभिव्यक्ति को जाने में सहायक होगा

प्रश्न का एक उदाहरण में बहुत ररेशान था क्योकि …………..।

समानार्थक प्रकार के प्रश्न  भाषा में अनुच्छेदों में दिए गए विचार, शब्द वाक्य, समानार्थक व विलोम शब्दों को चनने के लिए भी इनका प्रोयगग किया जा सकता है

स्थानीय प्रकार के प्रश्न भूगोल में नक्शा कौशल को मापने के लिए इन शब्दो, का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न का एक उदाहरण नक्शे में सिडनी, क्लाराडो रेगिस्तान दर्शाएँ ।

रुपान्तरण प्रकार इस प्रकार के प्रश्नों का प्रयोग केवल भाषा को जाँचने के लिए होता है। इस तरह के प्रश्नों के द्वारा कथ्य, वाच्य, संश्लेषण व वाक्य –रुपान्तरण आदि को जाँचा जा सकता है।

निर्वचनात्मक प्रश्न(Uplabdhi ka Mulyakan Evolution of Achievement Study Material in Hindi)

निर्देश बस की समय सारणी को पढे और नीचे दिए गए प्रश्नों का उत्तर दे

हिमाचल प्रदेश सड़क बस सेवा समय सारणी

मार्ग दिल्ली से जाने का समय दूसरी तरफ से जाने का समय दूरी किराया (रुपयों में)
दिल्ली –बैद्दनाथ

दिल्ली –चम्बा

दिल्ली-धर्मशाला

18:15

20:00

21:45

17:30

14:00

19:30

539

626

513

77.00

84.00

71.50

रिक्त स्थान प्रकार के प्रश्न

इस प्रकार के प्रश्नों में एक कथन दिया जाता है जिसमें कि एक शब्दों को उनके स्थान से हटा दिया जाता है और छात्रों को इन रिक्त स्थानों में उपयुक्त शब्द भरने के लिए कहा जाता है। इसका एक उदाहरण नीचे दिया गया है

  • सभी प्राणी ……प्राप्त करने के लिए सांस लेते है (ऊर्जा)

चयनात्मक प्रकार के प्रश्न

vvvvvv

इस प्रकार के प्रश्नों में छात्रों को विकल्प के रुप में उत्तर दिए जाते है, जिनमें से उन्हे सही उत्तर का चयह करना होता है। इन प्रश्नों को वस्तुनिष्ठ प्रश्न कहा जाता है। ये विकल्प के तौर पर बारी बारी से होते है, इनके कई प्रकार होते है, यथा विकल्पात्मक उत्तर मिलान बहुविकल्पात्मक आदि।

चयन प्रकार के प्रश्न सभी वस्तुनिष्ठ प्रश्न ही होते है। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में एक सही उत्तर दिया होता है, जिसे छात्रों को दिए गए विकल्पों में से चुकर बताना होता है। क्योंकि विद्दार्थियों को वस्तुनिष्ठता के आधार पर उत्तर चुननी होता है। अत: इस प्रकार के प्रश्नों को वस्तुनिष्ठ प्रश्न कहा जाता है । इसका अर्थ यह हुआ कि परीक्षार्थी को उतने ही नम्बर मिलेगे, भले ही कोई भी उनका मूल्यांकन करे । इस प्रक्रिया से बह यन्त्रवत अंक प्राप्त कर सकता है। ये उस स्थिति में लोकप्रिय है जब बड़ी संख्या में उम्मीदवार परीक्षा देते है। नीचे वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्नों के विभिन्न रुप दिए दए हैं

वैकल्पिक उत्तर प्रकार के प्रश्न—सत्य/असत्य, सही/गलत एवं हाँ/नही

मिलान प्रकार के प्रश्न –एकल, दोहरा, कुँजी/जाँच –सूची साँचा एवं रिक्त स्थान भरना।

बहुवैकल्पिक –प्रश्न रुप में एवं अपूर्ण कथन।

वैकल्पिक उत्तर प्रकार

इस तरह के प्रश्नों में छात्रों को विकल्प के रुप में दिए गए दो में से किन्ही एक सही उत्तर का चयन करना होता है।

विभिन्न प्रकार के वैकल्पिक प्रश्न- उत्तर इस प्रकार है

  • सत्य –असत्य और हाँ-नही प्रश्न

इस प्रकार के प्रश्नों में एक कथन दिया जाता है और छात्रों को यह बताना होता है कि कथन सत्य है या असत्य। सत्य /असत्य वाले प्रश्न सरलता से बनाए जा सकते है और आसानी से निरीक्षित किए जा सकते हैं। ये विद्दार्थियों की समझ को भली- भाँति विश्वसनीय ढंग से मापते है। विशेष रुप से कक्षा में ली जाने वाली परीक्षाओं में।

  • कथन अगर सत्य है तो स लिखे यदि असत्य है तो अ लिखें
  • जानवर और पौधे दोनों जीवनपूर्ण हैं
  • सभी जानबर छोटे जानवरों को खाते है।
  • सही/ गलत प्रकार व हाँ/नही प्रकार

सही कथन के समक्ष सहीं का चिह्र लगाएँ, गलत के सामने गलत का ।

  • द्रव का निश्चित आकार नहीं होता ।
  • बर्फ पानी से हल्का होता है।

मिलान प्रकार

मिलान प्रकार के प्रश्न दो खानों में होते है। शब्द व कथन एक खाने में दिए जाते है, जिनका मिलान दूसरे खाने में दिए गए उत्तरों से करना होता है। मिलान प्रकार के प्रश्न नीचे दिए गए है।

  • एकल मिलान इस प्रकार के प्र्श्नों में दो खाने दिए जाते है। बाएँ खानें में प्रश्न पूछे जाते है और दूसरे में उत्तर दिया जाता है। छात्रों को पूछे गए प्रश्नों का मिलान करके उत्तर देना होता है।

निर्देश  खाने क और ख में दिए गए शब्दों का मिलान करे (सरल)।

खाना   (क) खाना  (ख)
(क)

(ख)

(ग)

सुबह

रात

दिन

तरे

24 घण्टे

सूर्य का प्रकाश

 निर्देश खाने (क) में दिए गए शब्दों का मिलान खाने (ख) में दिए गए अर्थो के अनुसार करें। (कठिन)

नाई

बैरा

बैकर

वास्तुविद

रखवाला

ब्रेड/ बिस्कुट बनाने वाला

स्थान की देखरेख करने वाला

लोगों के बाल काटने वाला

होटल में  खाना परोसने वाला

इमारतों व पुलों का रेखांकन करने वाला

 

  • दोहरा मिलान स प्रकार के प्रश्नों में दो क्षेत्रों की जानकारी के लिए एक सूची दी जाता है जिसमें दो के बजाय तीन खानों का प्रयोग किया जाता है। मध्य खाने में उत्तर द्ना होता है और बाएँ व दाएँ दोनों तरफ उसके उत्तर दिए होते है।

यहाँ तीन खाने दिए गए है। दूसरे खाने में चार जानवरों की सूची दी गई है, जबकि पहले खाने में जानवरों का व्यवहार और तीसरे खानें में भोजन के प्रकार है, जिन्हें वे सामान्यत: खाने दो और तीन से सही उत्तर चुने खाते है।

खाना 1 (व्यवहार) खाना 2 (जीव-जन्तु) खाना-3 (भोजन)
1.

 

2.

 

3.

4.

दिन का प्रकाश पसन्द करते है लेकिन रात में सक्रिया होता है।

दिन का प्रकाश पसन्द करते है लिकिन दिन में सक्रिय होते है ।

दिन का प्रकाश पसन्द नही करते ।

दिन का प्रकाश पसन्द नही करते, लेकिन रात और दिन दोनों में सक्रिय रहते है।

(क)  चूहा

 

(ख) कीड़ा

 

(ग)  घर

 

(घ)  छिपकली

(क) प्राणी

(ख) फूलों का मरकरंद

(ग)  जानवरो का मांस

(घ)  पौधों के पत्ते

 

(ड) रोटी

(च) कार्बनिक वस्तु का भार

(छ) लकडी

(ज) साँप

कुंजी सीची और जाँच- सूची

इसमें छात्रों को कुंजी के रुप में दो/तीन विकल्प दिए जाते हैं जिसमें उसे कुंजी सूची के आधार पर उत्तर देना होता है। नीचे दिए तत्वों के बारे में बताइए कि कौन सा ठोस (ठो). द्रव (द्र) गैस (गै) है

विषय स्थिति
जल

पारा

वाष्प

लोहा

द्रव

ठोस

गैस

ठोस

बहु –विकल्पात्मक प्रश्न

सभी वस्तुनिष्ठात्मक प्रकार के प्रश्नों में बहुविध चयनात्मक प्रश्न बहुत उपयोगी प्रयोग होत है। इस तरह के प्रश्नों में एक अधूरा कथन दिया होता है और उसके लिए चार/पाँच वैकल्पिक उत्तर दिए होते है। विकल्पों में से छात्रों को सही उत्तर देना होता है। इसमें बहु-वैकल्पिक प्रश्न दो प्रकार के होते है।

प्रश्न रुप (परीक्षण अनुदेशात्मक वस्तुनिष्ठ- व्याख्या)

  • इनमें से कौन सी बीमारी नहीं हैं?
  1. चेचक
  2. ह्रदयघात
  3. मलेरिया
  4. हैजा
  • अधुरे कथन के रुप में (वस्तुनिष्ठ अनुदेशनात्मक परीक्षण सम्बन्धों की पहचान कीजिए)

व्हेल और चमगादड़ दोनों में निम्नलिखित बातें समान होती हैं

  1. बाल
  2. पंख
  3. अंग
  4. गर्दन

उपरोक्त प्रश्नों के इस रुप का प्रयोग विभिन्न परीक्षणों और छात्रों द्वारा सफलता प्राप्त करने में कयी जाता है यदि परीक्षा में विक्षिन्न प्रकार के प्रश्नों का प्रयोग किया जाए तो यह निश्चित तौर पर वस्तुनिष्ठ और सन्तेषजनक होगा। दूसरी तरफ वनिश्वसनीय और विधिमानय तदरीका भी होगा। यह सही है कि इन विभिन्न रुपों की भी कुछ सीमा है। इसलिए रुपों का चयन करते समय अध्यापक को सभी पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक हे ताकि इन रुपों का प्रयोग सही तरीके से हो सके ।

 

 
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