CTET UPTET Things We Make Do Study Materials in Hindi

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मानव निर्मित उपयोगी वस्तुएँ CTET UPTET Things, We Make and Do Study Materials in Hindi

हमारे चारों ओर की वस्तुएँ एक अथवा एक से अधिक पदार्थ से बनी होती हैं। ये पदार्थ काँच, धातुओं, प्लास्टिक, लकड़ी, रुई, काचगज तथा मृदा हो सकते हैं। किसी वस्तु के निर्माण में कौन-सा पदार्थ उपयोग किया जाए, ये उसके उपयोग पर निर्भर करता है। जैसे गिलास, बीकर आदि बनाने के लिए काँच, प्लास्टिक, धातु अथवा कोई ऐसा पदार्थ प्रयोग किया जाता है जो द्रवों को रोक सके।

पदार्थों का वर्गीकरण Classification Of Substances 

पदार्थ मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते है

  • ठोस
  • द्रव
  • गैस

पदार्थों के गुण CTET UPTET Properties of Substances Study Material in Hindi

किसी वस्तु के निर्माण के लिए पदार्थ का चयन उस पदार्थ के गुण तथा उपयोग की जाने वाली वस्तु पर निर्भर करता है। पदार्थों के यह प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं

  1. दिखावट हमारे चारों और की वस्तुएँ एक अथवा एक से अधिक पदार्थों से बनी होती हैं। ये पदार्थ काँच, धातुएँ प्लास्टिकस लकड़ी, रुई, कागज तथा मृदा हो सकते हैं। पदार्थों के पृष्ठों को रेगमाल से रगड़कर यह देखा जा सकता हैं। कि वे द्दुतिवान हैं अथवा नहीं।पदार्थ जिनमें इस प्रकार की द्दुति होती है, वे धातु होते हैं। लोहा, ताँबा, एल्युमीनियम तथा सोना धातुओं के उदाहरण हैं। कुछ धातुएँ बहुधा अपनी चमक खो देती हैं और द्दुतिहीन दिखाई देने लगती हैं ऐसा उस पर वायु तथा नमी की अभिक्रियाओं के कारण होता है इसलिए केवल ताजे-कटे पृष्ठों पर ही द्दुति दिखाई देती है।
  1. कठोरता जब हम विभिन्न पदार्थों को अपने हाथों से दबाते है, तो उनमें से कुछ को दबाना कठन होता है, जबकि कुछ अन्य आसानी से सम्पीडित हो जाते हैं। धातु की एक चाबी को लकड़ी, एल्युमीमियम, पत्थर के टुकड़े, कील, मोमबत्ती, चाक, अन्य कोई पदार्थ अथवा वस्तु के पृष्ठों को खरोंचने का प्रयास करते हैं तो हम कुछ पदार्थों को आसानी से खरोंच सकते हैं, जबकि कुछ अन्य पदार्थों को इतनी आसानी से नहीं खरोचा जा सकता। वे पदार्थ जिन्हे आसानी से सम्पीडित किया अथाव खरोंचा जा सकता है, कोमल पदार्थ कहलाते हैं। जबकि अन्य पदार्थ जिन्हें सम्पीडित करना कठन होता है, कठोर पदार्थ कहलाते हैं। उदाहरण के लिए रूई कोमल है जबकि लड़की कठोर है।
  2. विलेयता कुच पदार्थ जल में पूर्णत: घुल जाते हैं। ये पदार्थ जल में विलेय हैं। अन्य पदार्थ जल के साथ मिश्रित नहीं होते तथा काफी समय तक गिलास में वलोडित करने पर भी जल में विलेय नहीं होते। ये पदार्थ जल में अविलेय हैं।कुछ द्रव जल में पूर्णत: मिश्रित हो जाते हैं। कुछ अन्य द्रव जल में मिश्रित नहीं होते और कुछ समय तक ऐसा ही छोड़ देने पर अपनी पृथक परत बना लेते है।कुछ गैसें जल में विलेय है, जबकि अन्य नहीं हैं। सामान्यत: जल में कुछ गैसे थोड़ी मात्रा में विलेय होती है उदाहरण के लिए, जल में विलेय ऑक्सीजन गैस, जल में रहने वाले जन्तुओं एवं पादपों की उत्तरजीविता के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। कुछ पदार्थ, जो जल में मिश्रित नहीं हो पाते या तो वे जल के पृष्ठ पर तैनने लगते हैं अथवा जल में डूब कर तली में पहुँच जाते हैं। हम ऐसे बहुत से उदाहरण देखते है जिनमें पदार्थ जल में तैरने लगते है अथवा डूब जाते हैं।
  1. पारदर्शिता उन पदार्थों अथवा सामग्रियों जिनसे होकर वस्तुओं को देखा जा सकता है, उन्हे पारदर्शी कहते हैं। इसके विपरीत, कुछ ऐसे पदार्थ भी हैं जिनसे होकर वस्तुओं को नहीं देखा जा सकता, उन पदार्थो को अपारदर्शी कहते हैं। ऐसे पदार्थों, जिनसे होकर वस्तुओं को देखा तो जा सकता है परन्तु बहुत स्पष्ट नहीं देखा जा सकता, उन्हे पारभासी कहते हैं। कागज पर लगे तेलीय धब्बे को जिसका उपयोग खाद्द पदार्थों का वसा के लिए परीक्षण करने में किया जाता है, वह पारभासी होता है।

पदार्थों का पृथक्करण CTET UPTET Separation of substances Study material in Hindi

हम पदार्थों के किसी मिश्रण से पदार्थों को पृथक् करते हुए कई बार देखते हैं। जैसे चाय बनाते समय चाय की पत्तियों को द्रव से छलनी द्वारा पृथक किया जाता है। मक्खन को पृथक् करने के लिए दूध या दही का मन्थन किया जाता है।

पृथक्करण की विधियाँ CTET UPTET Methods of separation Study Material in Hindi

  1. थ्रेशिंग खेत अथवा खलिहानों में गेहूँ या चावल की सूखी डंडियों के गटठर अक्सर दिखाई देते हैं। डंडियों से अनाज को अलग करने से पहले धूप सुखाया जाता है। प्रत्येक डंडी पर अन्नकणों अथवा चिपके होते हैं। डंडियों से अन्नकणों अथवा अनाज को पृथक करने के प्रक्रम को थ्रेशिंग कहते हैं। इस प्रक्रम में डंडियों को पीटकर अन्नकरणों को पृथक् किया जाता है।
  2. निष्पावन सूखे रेत तथा बुरादे अथवा सूखी पत्तियों के पाउडर का एक मिश्रण बनाइए। इस मिश्रण को किसी प्लेट के ऊपर रखिए। हम पाते हैं कि दोनों अवयवों को आसानी से पृथक नहीं किया जा सकता है। किसी मिश्रण के अवयवों को इस प्रकार पृथक करने की विधि निष्पावन कहलाती है। निष्पावन का उपयोग पवनों अथवा वायु के झोंकों द्वारा मिश्रण से भारी तथा हल्के अवयवों को पृथक् करने में किया जाता है। साधारणतया किसान इस विधि का उपयोग हल्के भूसे को भारी अन्नकणों से पृथक करने के लिए करते हैं। भूसे के हल्के कण पवन के साथ उड़कर दूर एकत्र हो जाते है, जबकि भीरी अन्नकण पृथक् होकर निष्पावन प्लेटफॉर्म के निकट एक ढेर बना लेते हैं।
  3. चालनी आटे से व्यंजन बनाते समय इसमें उपस्थित चोकर तथा अन्य अशुद्धियों को पृथक करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए हम चालनी (छन्नी) का उपयोग करते हैं तथा उसमें आटा डालते हैं। आटे के छोटे कण चालनी के छिद्रों द्वारा निकल जाते हैं जबकि बड़ी अशुद्धियाँ छलनी में रह जाती हैं। प्राय: आटे की मिल में गेहूँ को पीसने से पहले पत्थरों तथा भूसे जैसी अशुद्धियों को हटाया जाता है। साधारणतया गेहूँ की बोरी को एक तिरछू तालनी पर डाला जाता है। चालन द्वारा पत्थर, डंडियाँ तथा भूसा जो निष्पावन तथा थ्रेशिंग के बाद गेहूँ में हर जाते हैं, को दूर किया जाता है। इसी प्रकार के बड़े बड़े चालनों को भवन निर्माण वाले स्थानों पर रेत स कंकड़ तथा पत्थर पृथक् करने के लिए उपयोग में लातु हुए देखा जो सकता है। चालने विधि का उपयोग मिश्रण के दो ऐसे अवयवों, जिनके आकारों में अन्तर हो, को पृथक् करने में किया जाता है।
  1. अवसाद, निस्तारण तथा निस्पान्दन कभी-कभी मिश्रण के अवयवों को निष्पावन अथवा हस्त चयन द्वारा पृथक् करना सम्भव नहीं होता। उदाहरण के लिए चावल तथा दाल में धूल, मिट्टी जैसे हल्के कण हो सकते हैं। चावल तथा दाल को पकाने से पहले चावल या दालों को जल से धोया जाता है। जब आप चावल या दाल में जल डालते हैं तब उन पर चिपकी हुई अशुद्धियोँ जैसे मिटटी व धूल के कण पृथक् हो जाते हैं। ये अशुद्धियाँ जल में चली जाती है जिससे जल थोड़ा मटियाला हो जाता है। मिश्रण में जल मिलाने पर भारी अवयवों के नीचे तली में बैठ जाने के प्रक्रिम को अवसादन कहते हैं। अवसादित मिश्रण को बिना हिलाए जल को मिट्टी सहित उड़ेलने की क्रिया को निस्तारण कहते हैं। अब चाय को एक छन्नी में इस प्रक्रम को निस्पन्दन (फिल्टर करना) कहते हैं।
  1. वाष्पन जब किसी मिश्रण में द्रव पदार्थ की अशुद्धि मिली हो, तो उसे दूर करने के लिए यह विधि प्रयोग लाई जाती है। मिश्रण को गर्म करने पर या गर्म स्थान पर रखने पर उसमें उपस्थित द्रव की मात्रा वाष्प बनकर उड़ जाती है। द्रव का वाष्पन बनकर उड़ने की प्रक्रिया ही वाष्पन कहलाती है।

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