CTET UPTET Study Area of Environment Study Material in Hindi

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पर्यावरण का अध्ययन क्षेत्र CTET UPTET Study Area of Environment Study Material in Hindi

मनुष्य ने अपने आर्थिक लाभ के लिए प्रकृति के स्वाभाविक पर्यावरण का विनाश कर दिया है। वनस्पतियों की अन्धाधुन्ध कटाई, जीव-जन्तुओं का शिकार, भूमण्ड का दोहन व शोषण, तीव्र औद्दोगीकरण, यातायात के बढते साधन, जनसंख्या विस्फोट आदि अनेक ऐसे कारण हैं जिनसे पर्यावरण में असन्तुलन उत्पन्न हो गया है। इस पर्यावरणीय असन्तुलन के कारण आज न केवल हमारी सभ्यता व स्वास्थ्य के लिए ही खतरा उत्पन्न हुआ है वरन् सम्पूर्ण प्राणी जगत के अस्तित्व के लिए ही खतरा उत्पन्न हो गया है। पर्यावरण की सुरक्षा व सुधार हेतु राष्ट्रीय स्तरों पर नाना प्रकार के कार्यक्रम चालू किए गए हैं जिनसे पर्यावरण की रक्षा तथा उसके विभिन्न अवयवों में सन्तुलन लाया जा सके।

पर्यावरण को सुधारने तथा उसमें पुन: सन्तुलन लाने के लिए यह आवश्यक है कि उसका सही व वैज्ञानिक अध्ययन किया जाए, उन कारणों का पता लगाया जाए जिनसे पर्यावरण में असन्तुलन आया है तथा उन उपायों को पता लगाकर उन्हे क्रियान्वित किया जाए जिनसे पर्यावरण को सुधारा जा सकता है तथा उसमें पुन: सन्तुलन लाया जा सकता है इसके लिए हमें पर्यावरण का अध्ययन करना होगा। यह अध्ययन एक कला के रूप में कम और एक विज्ञान के रूप में अधिक करना होगा। पर्यावरण अध्ययन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही किया जा सकता है। यह एक विज्ञान है। पर्यावरण का अध्ययन वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा विधियों से ही किया जा सकता है एक तत्व कार्य तथा घटना के क्या प्रभाव होते है? कारण प्रभावों के मध्य क्या सम्बन्ध है?

पर्यावरण का अध्ययन क्षेत्र CTET UPTET Study Area of Environment Study Material in Hindi

पर्यावरण अध्ययन में पारिस्थितिकीय, वनस्पति विज्ञान, जीव-विज्ञान, भौतिक –विज्ञान, स्वास्थ्य विज्ञान, वायुमण्डल विज्ञान जल मण्डल विज्ञान को सम्मिलित कर सकते है। पर्यावरणीय अध्ययन के लिए भी इऩ विज्ञानों के समान ही प्रयोगशाला, प्रयोग तथा उपकरणों की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, पर्यावरण अध्ययन में यदि हमें जल-मण्डल का अध्ययन करना है तो विभिन्न नदियों, झीलों तथा सागरों में पाए जाने वाले जल के गुणों, तत्वों अवयवों तथा विशेषताओं का वैज्ञानिक अध्ययन करना होगा। इस प्रकार हम पाते है कि पर्यावरण अध्ययन अपने में एक शुद्ध तथा सशक्त विज्ञान है, इसकी अध्ययन प्रणाली पूरी तरह से वैज्ञानिक होती है।

पर्यावरणीय अध्ययन से निकाले गए निष्कर्ष वैज्ञानिक निष्कर्षों के ही समान वैध तथा विश्वसनीय होते है, क्योकि मनुष्य परिवर्तनशील है किन्तु पर्यावरण एक विज्ञान है। इसलिए इसके नियम सुनिश्चत होते है, जैसे वायु प्रदूषण होगा तो प्राणी सम्पदा नष्ट होगी तो मृदा प्रदूषण होगा। इसी प्रकार के ये कुछ दृढ़ सत्य हैं जो विज्ञान के नियमों के समान ही वैध एवं विश्वसनीय हैं।

निम्नलिखित क्षेत्र पर्यावरण के अध्ययन क्षेत्र में आते हैं (CTET UPTET Study Area of Environment Study Material in Hindi)

  1. अध्ययन एवं प्रायोगिक कार्य जन्तु विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान एवं विभिन्न दवाइयों के परीक्षण हेतु मेंढ़क, मछली, गिनीपिग आदि का प्रयोग बहुतायत से किया जाता हहै जिससे इन जातियों पर लुप्त होने का संकट मँडराना शुरू हो गाय है। इस हेतु पर्यावरणाविदों ने वैज्ञानिकों को चेतावनी देनी शुरू कर ददी है कि आगर इन जन्तुओं का सी तरह से प्रयोग किया जाता रहा तो वह दिन दूऱ नहीं जब ये प्राणी समाप्त हो जाएँगे।
  2. विकास एवं पर्यावरण हमारे यहाँ होने वाली विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों जैसे बाँध बनाना, खनन, सड़क निर्माण आदि से भी पर्यावरण को क्षति पहुँचती है। इनके कार्यों से उस जगत पर वनस्पति हटाई जाती है, भूमि को खोदा जाता है जिससे पारिस्थितिकी तन्त्र प्रभावित होता है। इन सभी से पर्यावरण प्रभावित होता है।
  3. अन्तरिक्ष एवं पर्यावरणीय अध्ययन पर्यावरण के अध्ययन क्षेत्र में न सिर्फ पृथ्वी वरन् अन्तरिक्ष भी सम्मिलित है। पृथ्वी के बाहर वायु जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियों का न होना अध्ययन का विषय है, साथ ही अन्तरिक्ष यात्रियों द्वारा फैलाया जा रहा मलबा भी पर्यावरण के लिए चिन्ता का विषय है।
  4. शहरीकरण वर्तमान में जन सामान्य के गाँवों से शहरों की ओर पलायन करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है जिससे शहरों में जनाधिक्य बढ़ने से कई समस्याएँ जन्म ले रही है, जिनमें से प्रमुख है—जल प्रदूषण, ठोस अपशिष्ट पदार्थों का निस्तारण आदि। इन समस्याओं के निस्तारण पर पर्यावरणविदों द्वारा किया जा रहा है।
  5. कृषि कार्य बढ़ती जनसंख्या की खाद्द आपूर्ति हेतु कृषि उपज को बढाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि उपज बढ़ाने हेतु विभिन्न प्रकार के संकरित बीज, कीटनाशक व उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है। ये साधन प्रत्यक्ष रूप से तो उपज बढ़ाने में सहायक सिद्ध होते हैं परन्तु इनका दुष्प्रभाव हमारे पर्यावरण पर पड़ रहा है। पर्यावरणविद् इन दुष्प्रभावों से बचने का हल ढूँढने की कोशिश कर रहे हैं और किसी वैकल्पिक समाधन की खोज में है। इसी प्रयास में आजकल जैविक खाद के उपयोग पर बल दिया जा रहा है।
  6. औद्दोगिक संयन्त्र एवं पर्यावरण औद्दोगिक संयन्त्र विकास के प्रतीक माने जाते हैं परन्तु ये पर्यावरण के लिए समस्याएँ भी पैदा करते हैं। विभिन्न उद्दोगों से निकलने वाला धुआँ, अपशिष्ट पदार्थ, प्रदूषित जल आदि पर्यावरण के लिए खतरा सिद्ध हो रहे हैं।

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