CTET UPTET Shiksha Shastra Pedagogy Upachaaraatmak Shikshan Remedial Teaching Study Material in Hindi

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उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching CTET UPTET Upachaaraatmak Shikshan Study Material in Hindi)

शैक्षणिक निदान का प्रयोजन ही उपचारात्मक शिक्षण है। शैक्षणिक निदान द्वारा बालकों की कठिनइयों का पता लगाकर उन कठिनाइयों को दूर करते हुए जो शिक्षण-कार्य अपनाया जाता है, उसे उपचारात्मक शिक्षण कहते है।

उपचारात्मक शिक्षण के भी उनके रूप हो सकते हैं यथा—बालकों की कठिनाइयों का सामूहिक रूप से निवारण और उचित अभ्यास, वैयक्तिक भेदों के आधार पर व्यक्तिगत बालक की अशुद्धियों का निवारण, उपचार गृहो अथवा भाषा-प्रयोगशालाओं में बालकों को उच्चारण एवं भाषा सम्बन्धी प्रशिक्षण और अभ्यास।

उदाहरण के लिए, सस्वर वाचन सम्बन्धी पूर्वोल्लिखित कठिनइयों को जान लेने रपर उपचारात्मक शिक्षण के निम्नांकित रूप अपनाए जा सकते हैं

  1. ऐसे अभ्यास दिए जाएँ जिनकी उपयोगिता का छात्र भी अनुभव करते रहें।
  2. बालकों को स्वयं अपनी प्रगति जानने का भी अवसर दिया जाए।
  3. रोचक एवं उपयोगी पुस्तकों की चर्चा, घटनाओं का वर्णन, साहसिक कहानियाँ, जिनमें प्रतिभा वाले बालक भी प्रतिभा लाले बालक भी परिश्रम एवं अध्यवसाय द्वारा महान् बन गए हो, सुनाई जाएँ और छात्रों से पढ़वाई जाएँ

उपचारात्मक शिक्षण –विधियां एवं प्रविधियाँ (CTET UPTET Shiksha Study Material in Hindi)

निदान का कार्य त्रुटु के कारम का पता लगाना है। उसके निराकरण के लिए विशिष्ट विधियों एवं प्रविधियों का चयन किया जाता है। यह शिक्षण सामान्य- शिक्षण से भिन्न होता है। यह व्यक्तिगत अधिक होता है इसलिए शिक्षण तथा अनुदेशन की व्यक्तिगत विधियों का प्रयोग किया जाता है। इसके लिए अभ्यास के साथ प्रमुख विधियाँ निम्नांकित हैं

  1. अभिक्रमित अनुदेशन में शाखीय अनुदेशन प्रमुख है।
  2. अनुवर्ग- शिक्षण –सामान्य- शिक्षण के उपरान्त व्यवस्था की जाती है।
  3. परिपाक-शिक्षण को पर्यवेक्षित अध्ययन भी कहते है।
  4. क्रियात्मक- अनुसान्धान विधि।

साधारणत: (CTET UPTET Important Study Material in Hindi)

साधारणत: हिन्दी की त्रुटियों पर ध्यान कम दिया जाता है, क्योंकि यह छात्रों की मातृभाषा है र यह सभी को आती है। छात्र भी हिन्दी के अध्ययन पर ध्यान नहीं देते है। उपचारात्मक विधियों का उपयोग विशेषकर गणित, विज्ञान तथा हिन्दी के अध्ययन पर ध्यान नहीं देते हैं। छात्रों को अपनी अभिव्यक्ति के लिए भाषा का ही प्रयोग करना होता है, शुद्ध भाषा के ज्ञान एवं कौशल से ही शद्ध सम्प्रेषण किया जात है। शब्दों का प्रयोग समुचित न करने पर उसके अर्थ के बजाय अनर्थ हो जाता है। अन्य राष्टों के छात्र तथा दितीय बाषा के रूम में हिन्दी –सीखने वाले छात्र हिन्दी की अशुद्धियों पर विशेष ध्यान देते है। जिनकी मातृभाषा हिन्दी है,वे हिन्दी की अशुद्धियों पर ध्यान कम देते हैं। हिन्दी- भाषा की त्रुटियों एवं अशुद्धियों के सुधार से हिन्दी भाषा की गरिमा रखी जा सकती  है और शुद्ध सम्प्रेषण किया जा सकता है।

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