CTET UPTET Man Made Goods Study Material in Hindi

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मानव निर्मित वस्तुएँ CTET UPTET Man Made Goods Study material in Hindi

विभिन्न प्रकार के पदार्थों से अनेक उपयोगी वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। मानव के द्वारा निर्मित कुछ उपयोगी वस्तुएँ निम्न हैं

  1. वस्त्र कुछ घरेलू सामान जैसे चादर, पर्दे, मेजपोश कम्बल, कपड़े आदि ये सभी भिन्न- भिन्न प्रकार के कपड़ों से बने होते हैं। इन वस्त्रों का निर्माण सूती, ऊनी, रेशमी तथा कृत्रिम रेशों से किया जाता है। वस्त्रों में प्रयुक्त धागे और अधित पतले धागों से मिलकर बने होते हैं, जिन्हें रेशा कहते हैं। कुछ वस्त्रों जैसे सूती, जूट, रेशमी तथा ऊनी वस्त्रों के रेशे कहते हैं। परन्तु वर्तमान समय में ऐसे रायायनिक पदार्थों, जिनका स्त्रोत पादप अथवा जन्तु नहीं है, से रेशों का निर्माण किया जा रहा है। इन्हे संश्लेषित रेशे कहते हैं। पॉलिएस्टर, नायलॉन और एक्रिलिक आदि संश्लेषित रेशों के उदाहरण हैं।

कुथ पादप रेशे (तन्तु) (CTET UPTET Kooth Plant Fiber (Tantu) Study Material in Hindi

  1. कपास (रुई) रुई की पतली लड़ियाँ रेशों से बनी होती हैं। इसे खेतों में उगाया जाता है। कपास पादप के फल नींबू की तरह होते हैं। ये फल पकने पर टूटकर खुल जाते हैं तब कपास रेशों को देखा जा सकता है। इस कपास फलों से कपास को हस्त चयन द्वार पृथक किया जाता है।
  2. जूट (पटसन) पटसन रेशों को पटसन पादप के तने से प्राप्त किया जाता है। भारत में इसकी खेती वर्षा ऋतु में की जाती है। सामान्यत: पटसन पादप (फसल) को पुष्पन अवस्था में काटते हैं। फसल कटाई के पश्चात् पादपों के तनों को कुछ दिनों तक जल में डुबोकर रखते हैं। ऐसा करने पर तने गल जाते हैं और इन्हें पटसन तन्तुओं से हाथों द्वारा अलग कर दिया जाता है।

सूती धागे की कताई CTET UPTET Spinning cotton yarn Study Material in Hindi

वस्त्र बनाने से पहले इन सभी रेशों को धागों में परिवर्तित कर लिया जाता है । रेशों को खीचकर ऐठते हैं। ऐसा करने से रेशे पास-पास आ जाते हैं और धागा बन जाता है। कताई करने के लिए एक सरल युक्ति हस्त तकुआ का उपयोग किया जाता है, जिसे तकली कहते हैं। हाथ से प्रचलित कताई उपयोग होने वाली एक अन्य युक्ति चरखा है। जबकि बड़े स्तर पर धागों की कताई का कार्य कताई मशीनों से किया जाता है। कताई के पश्चात् धागों का उपयोग वस्त्र बनाने में किया जाता है।

धागे से वस्त्र का निर्माण CTET UPTET Fabrication of thread Study Material in Hindi

धागे से वस्त्र बनाने की कई विधियाँ हैं। इनमें दो प्रमुख विधियाँ निम्न हैं

  1. बुनाई वस्त्र धागों के दो सेटो, जिन्हे एक साथ व्यवस्थित किया जाता है, से मिलकर बनते हैं। धागों के दो सेटों को आपस में व्यवस्थित करके वस्त्र बनाने की प्रक्रिया को बुनाई कहते हैं।
  2. बँधाई स्वेटर के एक धागे को खीचने पर एकल धागा लगातार खिंचता चला आता है तथा वस्त्र उधड़ता चला जाता है। मोजे और बहुत सी अन्य पहनने की वस्तुएँ बँधाई द्वारा भी की जाती ह। बुनाई तथा बँधाई का उपयोग विभिन्न प्रकार के वस्त्रों के निर्माण में किया जाता है। इन वस्त्रों का उपयोग पहनने की विविध वस्तुओं को बनाने में होता है।
  3. ईधन ईधन वे पदार्थ होते है, जो जलाने पर ऊष्मा व प्रकाश उत्पन्न करते हैं। ईधनों को उनकी अवस्था के अनुसार ठोस, द्रव तथा गैस में वर्गीकृत किया जाता है। द्रव और गैसीय ईधन आसानी से इस्तेमाल किए जा सकते हैं। लकड़ी, कोयला, पैट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस आदि प्राकृतिक ईधन है। चारकोल, कोक, पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, जल गैस तथा कोल गैस आदि शोधित ईधनों के उदाहरण हैं। एक अन्य प्रकार के वर्गीकरण में ईधनों को प्राथमिक तथा दितीयक रूप में वर्गीकृत किया जाता है। प्राथमिक ईधन, जैसे कौयला, लकड़ी तथा पेट्रोलियम मूल रूप से ऊष्मा उत्पन्न करने हेतु उपयोग किए जाते हैं। इसके विपरीत दितीयक श्रेणी के ईधनों के उदाहरण हैं। प्रमुख उपयोगी ईधनों का संक्षिप्त वर्णन अग्रलिखित है
  4. कोल गैस कोल गैस कोयले के भंजक आसवन के द्वारा बनाई जाती है। इस गैस में 54% हाइड्रोजन, 35% मिथेन, 11% कार्बन मोनोऑक्साइड, 5% हाइड्रोजन व 3% कार्बन डाइ-ऑक्साइड आदि गैसों का मिश्रण होता है। यह वायु के साथ विस्फोट का कार्य करती है। यह रंगहीन व विशेष गन्ध वाली गैस है।
  5. प्रोड्यूसर गैस प्रोड्युसर गैस मुख्यत: नाइट्रोजन व कार्बन मोनोऑक्साइड गैसों का मिश्रण है। इसमें 60% नाइट्रोजन, 30% कार्बन मोनोऑक्साइड व शेष कार्बन डाइ-ऑक्साइड व मिथेन गैस होती है। इसका प्रयोग कोक-भटटी तथा इन्जनों में ईधन के रूप में किया जाता है।
  6. जल गैस इस गैस की खोज सर्वप्रथम स्वीडन के शीले नामक वैज्ञानिक ने 1972 में की थी। अपने उच्च क्रोरोफिल मान के कारण यह एक अच्छा ईधन है जिसका उपयोग बड़े पैमाने पर अमोनिया एवं मिथाइल एल्कोहल के उत्पादन में किया जाता है कार्बन मोनोऑक्साइड एवं हाइचचड्रोजन का मिश्रण जिसे लाल तप्त कार्बन पर जलवाष्प प्रवाहित कर प्राप्त किया जाता है, जल कहलाता है।

C + H2O = H2 + CO – 28 किलो कैलोरी इस गैस से बहुत अधिक ऊष्मा की मात्रा प्राप्त होती है। इसका प्रयोग अपचायक के रूप मे एल्कोहल, हाइड्रोजन आदि के औद्दोगीकरण निर्माण में होता है।

  1. प्राकृतिक गैस ( Natural Gas) प्रकृतिक गैस में मुख्यत: मिथेल (CH4) होती है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसे घर तथा कारखानों में भी सीधा जलाने के लिए उपयोगा किया जाता है। यह आसानी स जलती है तथा ऊष्मा उत्पन्न करती है। यह हाइड्रोजन गैस का भी अच्छा स्त्रोत है जिसकी आवश्यकता उर्वरक बनाने में पड़ती है।
  2. तरल पैट्रोलियम गैस (LPG) ब्यूटेन गैस को उच्च दाब पर आसानी से द्रव अवस्था में परिवर्तित किया जा सकता है। द्रव रूप में यह सिलेण्डरों में उपलब्ध कराई जाती है। द्रव रूप में यह लिलेण्डरों में उपलब्ध कराई जाती है तथा तरल पैट्रोलियम गैस के नाम से जाना जाता है। इस गैस का एक ग्राम लगभग 50 KJ ऊर्जा करता है। सुरक्षा की दृष्ट्रि से इसमें एक अत्यन्त दुर्गन्धयुक्त पदार्थ एथिल मर्केप्टन मिला दिया जाता है जिससे इस गैस के रिसाव का पता आसानी से लग जाता है।
  3. कोयला कोयले उन वृक्षों के अवशेष हैं जो लगभग 300 करोड़ वर्ष पृथ्वी के विशाल उथले दलदलों में पाए जाते थे। धीरे-धीरे धसंते हुए अधिकग दबाव के कारण वृक्षों के अवशेष ऊर्जा के भण्डार घरों के रूप में परिरक्षित हो गाए। कोयले में अधिकाशंत: कार्बन, हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के अणु तथा थोडी सी मात्रा में सल्फर होता है। यह तीन मुख्य रूपों में पाया जाता है- भूरा कोयला, बिटुमेनी कोयला तथा ऐन्थ्रासाइट विभिन्न प्रकार के कोयले में कार्बन, दाह्म पदार्थ तथा नमी की मात्रा भिन्न होती है। उदाहरम के लिए, भूरे कोयले में 38% कार्बन, 19% दाह्रा पदार्थ तथा शेष 43% नमी होती है। जबकि एन्थ्रासाइट में 96% कार्बन, 1% दाह्रा पादर्थ तथा केवल 3% नमी होती है। बिटुमिनस कोयले मे 66% कार्बन पाया जाता है। सबसे उत्तम प्रकार का कोयला ऐन्थ्रासाइट है। कोयले को हवा की अनुपस्थिति में जलाने पर कोक प्राप्त होता है। एक सरल विधि द्वारा कोयले से कोलतार प्राप्त किया जाता है। इस प्रक्रिया को भंजक आसवन कहते हैं।

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