CTET UPTET Food items their sources Study Material in Hindi

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भोजन (CTET UPTET Food items their sources Study Material in Hindi)

मनुष्य की पहली र सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता भोजन है। मनुष्य या फिर किसी भी जीव-जन्तु के जीवित रहने के लिए उसके शरीर में विभिन्न प्रकार की जैविक प्रक्रियाओं का हना आवश्यक होता है। उसके शरीर की इऩ जैविक प्रक्रियाओं के सम्पन्न होने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है जो कि भोजन से प्राप्त होती है। इस प्राप्त ऊर्जा से ही मनुष्य अपने सारे क्रियाकलाप को सम्पन्न कर पाता है, जैसे चलना, दौड़ना, साँस लेना इत्यादि।

इसलिए कहा जा सकता है कि भोजन मानव जीवन के लिए अनिवार्य है। भोजन के बिना मानव जीवन सम्भव नहीं है.

खाद्द पदार्थ एवं उनके स्रोत (CTET UPTET Food items Their Sources Model Paper)

मनुष्य एवं सभी जीव-जन्तु अपने भोजन में विभिन्न प्रकार के पदार्थों को सम्मिलित करते है। सामान्य रूप से एक मनुष्य के प्रतिदिन के भोजन में गेहुँ, चावल, दाल, घी, नमक, जल, तेल आदि पदार्थ अवश्य सम्मिलित होते हैं। गेहूँ, चावल और दाल जैसे खाद्द पदार्थ हमें पेड़ –पौधों से प्राप्त  होते हैं। इनके अलावा कुछ अन्य पदार्थ जैसे दूध, अण्डा, मुर्गा, मछली माँस आदि हमें जन्तुओं से प्राप्त होते हैं। खाद्द पदार्थों को उनके स्त्रोतों के आधार पर दो भागों में विभक्त किया जाता है

  1. पादप- उत्पाद  2. जन्तु –उत्पाद

1.पादप –उत्पाद

जिन खाद्द पदार्थों के लिए मनुष्य पेड़ –पौधों पर निर्धर करता है, पादप-उत्पाद कहलाते हैं। विभिन्न प्रकार के पादप –उत्पादों का उल्लेख निम्न प्रकार है

  • फल फलों से विटामिन, खनिज लवण तथा शक्कर की प्राप्ति होती है। ये शरीर की वृद्धि में सहायक होते हैं। फल सामान्य दो प्रकार के होते हैं- रसदार और शुष्क। रसदार फलों में अमरूद, सेब, सन्तरा, आम, अंगूर, अनार, केला आदि प्रमुख हैं। इनसे सुक्रोज तथा शक्कर प्राप्त होते हैं। शुष्क फलों में काजू-बादम, किशमिश, अखरोट आदि आते हैं। ये सभी भी हमें पौधों से प्राप्त होतो हैं।
  • सब्जियाँ विभिन्न प्रकार के पौधों के विभिन्न भागों का सब्जियों के रूप में प्रयोग किया जाता है। आलू, मूली, शलजम, भिण्डी, करेला, फूलगोभी आदि प्रमुख सब्जियाँ तथा पालक, मेथी, सोआ आदि प्रमुख भाग हैं।
  • अनाज अनाज की फसलों में धान, गेहूँ, जौ, बाजरा, मकई आदि मुख्य हैं। इनसे कार्बोहाइड्रेट की प्राप्ति होती है। स्वस्थ रहने के लिए अरहर, मूँग, चना, उड़द, मसूर आदि की दाल से प्रोटीन की प्राप्ति होती है।
  • मसाला भोजन को सुपाच्य एवं स्वादिष्ट बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के मसाले हमें पौधों से ही मिलते हैं। कुछ मसालों का उपयोग औषधि के रूप में भी किया जाता है।इनमें अदरक, हल्दी, सोंठ, प्याज, केसर, लाल मिर्च, लौग आदि मुख्य हैं।
  • पेय पदार्थ चाय, कॉफी, कोको आदि पेय पदार्थ हमें पौधों से ही प्राप्त होते हैं।
  1. जन्तु-उत्पाद Animal product

मनुष्य भोजन के लिए पौधों के साथ-साथ जन्तुओं पर भी निर्भर रहता है। जन्तुओं से प्राप्त भोजन में माँस, मछली आदि का प्रमुख स्थान है। भेड़, हिरन, खरगोश, मुर्गा आदि से माँस प्राप्त होता है। मछली का माँस भी एक स्वादिष्ट एवं भोज्य पदार्थ है। माँस के अतिरिक्त जन्तुओं से हमें अण्डे भी प्राप्त होते हैं। माँस एक अण्डों के अतिरिक्त जन्तुओं से हमें अण्डे भी प्राप्त होते हैं। माँस अण्डों के अतिरिक्त जन्तुओं से हमें और भी खाद्द पदार्थ प्राप्त होते हैं। कुछ प्रमुख खाद्द पदार्थ व उनके स्त्रोत निम्नलिखित हैं

खाद पदार्थ स्त्रोत
शहद

दूध

तेल/घी

साग

दाल

चीनी

चाय

कॉफी

मधुमक्खी

गाय, भैस, बकरी आदि

पौधे/ जन्तु

पौधे के तने व पत्ती

पौधे के बीज

पौधे (गन्ने) का रस

पौधे की पत्तियाँ

पौधे के बीज

भोजन की आवश्यकता Food Requirements Study Material in Hindi

प्रत्येक मनुष्य के लिए भोजन आवश्यक है। भोजन से वे जीवित रहते हैं तथा उनकी वृद्धि होती है। जो भोजन हम खाते है उससे हमें ऊर्जा प्राप्त होती है। यही ऊर्जा विभिन्न शारीरिक क्रियाओं, जैसे चलना, दौड़ना, उठना, साँस लेना आदि के लिए आवश्यक है। इसी ऊर्जा से शरीर का विकास होता है। यदि हम भोजन नहीं करेंगे तो शरीर का विकास होता है। यदि हम भोजन नहीं करेंगे तो शरीर का विकास होता है। यदि हम भोजन नहीं करेंगे तो शरीर की वृद्धि नहीं होगा और शारीरिक क्रियाएँ नहीं हो सकेगी। अत: मनुष्य के लिए भोजन आवश्यक है।

जन्तुओं का भोजन  Animal Food (CTET UPTET Food Items their Sources Study Material in Hindi)

भोजन हम लोगों के साथ-साथ पौधों एवं जन्तुओं दोनों को जीवित रहने तथा विकास के लिए आवश्यक है। पौधे अपने भोजन का उत्पादन स्वयं कर लेते हैं अर्थात वे अपना भोजन स्वयं बना लेते हैं। जब जन्तु पौधों को खाते हैं तो वे पौधों में जमा की गई ऊर्जा प्राप्त करते हैं।

जन्तु अपने भोजन का उत्पादन स्वयं नहीं कर पाते। उन्हें भोजन के लिए पौघों या अन्य जीवों पर निर्भर रहना पड़ता है। वे जीवित रहने एवं विकास के लिए पौधों अथवा अन्य जन्तुओं को अपने भोजन में उपयोग करते हैं। इसलिए जन्तु, उपभोक्ता तथा पौधे उत्पादक कहलाते हैं। जन्तुओं को उनके द्वारा उपभोग किए जाने वाले भोजन के आधार पर निम्नलिखित भागों में वर्गीकृत किया जाता है

  • शाकाहारी जन्तु जो केवल पौधे ही खाते हैं। वे घास, पत्तियाँ, फल, अन्न आदि खाते है, इन्हें शाकाहारी जन्तु कहते हैं जैसे हाथी, घोड़ा आदि।
  • माँसाहारी कुछ जन्तु केवल अन्य जन्तुओं का माँस खाकर अपना निर्वाह करते है, इन्हें माँसाहारी जन्तु कहते है जैसे- शेर, गिद्ध आदि।
  • सर्वाहारी कुछ जन्तु पौधों के साथ अन्य जन्तुओं का भी माँस खाकर अपना निर्वाह करते हैं, इन्हे सर्वाहारी जन्तु कहते है, जैसे –मनुष्य, कुत्ता आदि।

जन्तुओं का उनके खाद्द पदार्थ के आधार पर वर्गीकरण (CTET UPTET Classification of Animals Based on Their Food Study Material)

शाकाहारी माँसाहारी सर्वाहारी
गाय

भैंस

गिलहरी

चूहा

मुर्गी

मधुमक्खी

शेर

चीता

गिद्ध

मकड़ी

छिपकली

मेढ़क

बिल्ली

कुत्ता

मनुष्य

कौआ

तिलचटट्

 

भोजन के अवयव मनुष्य के सारे कार्य, वृद्धि, स्वास्थ एवं जीवन को बनाए रखने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। इस भोजन के बहुत सारे अवयव होते हैं जो शरीर के लिए विशेष रूप से उपयोगी होते हैं। इन अवयवों का संक्षुप्ति वर्णन निम्नलिखित है

कार्बोहाइड्रेट Carbohydrate

मनुष्य के भोजन का यह एक बहुत ही मुख्य अवयव है जिसमें सबसे ज्यादा ऊर्जा निहित होती है। हम प्रतिदिन के भोजन में जो कार्बोहाइड्रेटले हैं वे निम्नलिखित हैं चावल, गेहूँ एवं दाल में कार्बोहाइड्रेट स्टार्च के रूप में विद्दमान रहाता है। यह स्टार्च बहुत सारे शर्करा के अणुओं के इकट्ठा होने होने से बनता है, इसलिए इसे शर्करा का बहुलक भी कहा जाता है। भोजन के इस अवयव अर्धात, स्टार्च का पहले पाचन होता है फिर फिर छोटे-छोटे शर्करा के कणों में टूट जाता है, जिनका कोशिकाओं में ऑक्सीजन की उपस्थित में ऑक्सीकरण होता है एवं ये कार्बन डाइ-ऑक्साइड जल एवं ऊर्जा में टूट जाते हैं। यही शरीर के विभिन्न कार्यो के लिए उपयोगी में लाई जाती है

शर्करा (चीनी)  + ऑक्सीजन –

C12 H22 O11 +120

          कार्बन – डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा

12CO2                              +             11H2O  + ऊर्जा

भोजन में मुक्त शर्करा के रूप में हम चीनी का इस्तेमाल करते हैं जिसका पाचन बहुत सरल होता है एवं तुरन्त ऑक्सीकरण के पश्चात ऊर्जा का निर्णाण करता है। यही कारण है कि जब हम बहुत थकने के बाद शर्बत (चीनी का पानी) पीते हैं तो थोड़ी ही देर में अपने अन्दर स्फूर्ति का अनुभव करते हैं। इसलिए चीनी को तात्क्षणिक ऊर्जा का स्त्रोत कहा जाता है।

कार्बोहाइड्रेट के कार्य कार्बोहाइड्रेट शरीर में ऊर्जा का एक मुख्य स्त्रोत है। शरीर के अन्दर होने वाली लगभग सभी क्रियाओं के लिए ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत कार्बोहाइड्रेट ही है। इसलिए भोजन का यह अवयव अत्यन्त आवश्यक है। इसके फलस्वरूप ही मनुष्य अपना सारा कार्य सम्पन्न कर पाता है एवं शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है। शरीर में ग्लाइकोजेन एवं स्टार्च के रूप में ऊर्जा संग्रहित भी रहती है जिसका आपाकालीन समयों में उपयोग किया जाता है। इसकी कमी से मनुष्य के कार्य करने की क्षमता में ह्रास (कमी) होती है। बहुत ज्यादा कार्बोहिड्रेट के ग्रहण करने से सुस्ती एवं आलस्य बढ़ता है।

वसा Fat

मनुष्य के खाद्द पदार्थों में वसा एक मुख्य अवयव है। इसे हम तेल, घी, मक्खन, पनीर, दूध काजू आदि के माध्यम से प्राप्त करते हैं। यह वसा अम्ल एवं ग्लिसरॉल का बना होता है। वसा के अणुओं में कार्बोहाइड्रेट की अपेक्षा ऑक्सीजन कम पाई जाती है। कार्बोहाइड्रेट के अलावा शरीर में यह दूसरे प्रमुख ऊर्जा का स्त्रोत होता है। हालाँकि नके अणुओं में प्रमुख ऊर्जा का स्त्रोत होता है। कार्बोहाइड़्रेट के अणुओं में उपस्थित ऊर्जा से बहुत ज्यादा ऊर्जा विद्दमान रहती है। परन्तु उस ऊर्जा की व्यवहारयुक्त ऊर्जा में उत्पत्ति के दौरान बहुत सारी ऊर्जा खपत हो जाती है, इसलिए कार्बोहाइड्रेट को ही सबसे मुख्य ऊर्जा स्त्रोत के रूप मे जाना जाता है।

वसा के रूप में जो भोजनव हम ग्रहण करते रहै उसे हमारा शरीर ऊर्जा में परिवर्तित कर देता है एवं स ऊर्जा के कछ भाग को वसा के रूप में शरीर में संचित करता है। वसा का कुछ भाग कौशिकाओं के बनने में सहायक होता है तथा संचित वसा शरीर में ऊर्जा बैंक के रूप में कार्य करता है। बहुत से जन्तु अपने शरीर में त्वचा के नीचे वसा को संग्रहित करते हैं, जैसे ह्रेल, वायरस आदि।

वसा के कार्य Fat function

  1. ऊर्जा की उत्पत्ति में उपयोगी होता है।
  2. कोशिका झिल्ली की संरचना में मुख्य भूमिका अदा करता है।
  3. संचित ऊर्जा के रूप में व्यवहार किया जाता है। ध्रवीय प्रदेशों में पाए जाने वाले ध्रुवीय भाली के चर्म के नीचे एडिपोस ऊतक की एक मोटी परत होती है जिसे वे बहुत ठण्ड के दौरान जब व हाइबरनेशन में होते है ऊर्जा के स्त्रोत के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

बहुत अधिक वसा के निरन्तर सेवन से अतिरिक्त वसा शरीर के खास-खास भागों में जमा होने लगता है जिससे शरीर बेडौल हो जाता है एवं शरीर की कार्यक्षमता धीरे-धीरे घटने लगती है। वसीय पदार्थों में कोलेस्टरोल की मात्रा अधिक होती है, जिसके ज्यादा सेवन से रक्त नलिकाओं की दीवारों पर ये जमा होते जाते हैं एवं दिल की बीमारी होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

प्रोटीन Protein

मनुष्य द्वारा व्यवहार किए जाने वाले खाद्द पदार्थो में प्रोटीन एक दूसरा सबसे महत्वपूर्ण अवयव है। प्रोटीन मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं- एंजोइमेटिक एवं संरचानात्मक प्रोटीन। एंजिमेटिक शरीर मे  होने वाली सभी मेटाबोलिक क्रियाओं को सम्पन्न कराने में मदद करता है, जैस जटिल कार्बोहाइड्रेट से ऊर्जा की प्राप्ति अनेक स्तर से गुजरने के बाद होती है। संरचनात्मक प्रोटीन शरीर के विभिन्न भागों को बनाने एवं टूट-फूट को ठीक करने के काम आता है। जैसे- पेशी, त्वचा, बाल, नाखून आदि सभी प्रोटीन के बने होते हैं। लाल रक्तकणिकाओं में पाया जाने वाला हीमोग्लोबिन भी प्रोटीन का बना होता है ज गैसों (ऑक्सीजन एवं कार्बन डाइ-ऑक्साइड) के आदन प्रदान का मुख्य कार्य करता है।

प्रोटीन भी एक बहुलक अणु है जो बहुत सारी इकाइयों से मिलकर बनता है। इन इकाइयों को एमीनो अम्ल कहा जाता है। इस एमीनों अम्ल में नाइट्रोजन, कार्बन, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के अल्वा सल्फर, फॉस्फोरस या कुछ धातु भी पाए जा सकते हैं।

माँस, मछली, दूध, अण्डे, दाल वगैरह हमारे भोजन में प्रोटीन के मुख्य स्त्रोत हैं।

प्रोटीन के कार्य Proteins

  1. उपापचय की क्रियाओं को सम्पन्न करता है।
  2. शारीरिक अवयवों के निर्माण में मुख्य भूमिका अदा करता है।
  3. शरीर में अक्सर होने वाली टूट-फूट की मरम्मत करता है।
  4. मृत कोशिकाओं एवं ऊतकों को बदलता है।

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