CTET UPTET Environmental Studies Plants Study Material in Hindi

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पौधे (CTET UPTET Study Material in Hindi)

हमारे आस पास विभिन्न प्रकार के पौधे पाए जाते हैं। कुछ पौधे छोटे होते हैं और कुछ बड़े जबकि कुछ धरती पर हरे धब्बों की तरह दिखाई देते है। कुछ पौछे पत्तियों वाले और कुछ बिना पत्तियों के होते हैं। हमारे घर, विद्दालय तथा पास-पड़ोस में पाए जाने वाले पौधें को उनके विशिष्ट लक्षणों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। प्रत्येक पौधे के अपने विशेष लक्षण होते हैं। इन्ही लक्षणों से हमे उसे वर्गीकृत करने में मदद मिलती है। सामान्यत: पौधों को दो समूहों में बाँटा जाता है

  1. पुष्पधारी पौधे
  2. पुष्प विहीन पौधे
  3. पुष्पधारी पौधे इस समूह के पौधों में जड़, तना, पत्तियाँ, फूल तथा फल होते हैं। फल के भीतर बीज होते है। जैसे –गेंदा, आम, सेब, गुलाब आदि पुष्पधारी पौधों को निम्नलिखित तीन वर्गों में बाँटा जा सकता है
  • वृक्ष वृक्ष लम्बे आकार में बड़े होते हैं। इनकी जड़े लम्बी तथा तना कठोर होता है। इसी तने से शाखाएँ तथा पत्तियाँ निकलती है, जैसे आम, नीम, पीपल आदि।
  • झाड़ियाँ झाड़ियाँ मध्यम आकार की होती हैं। झाड़ियों का तना भी वृक्षों की तरह कठोर होता है। इनमें प्राय: शाखाएँ होती हैं। इनकी बहुत सी शाखाएँ भूमि के ठीक ऊपर ही दिखाई देने लगती है जैसे गुलाब गुड़हल आदि।
  • शाक शाक छोटे आकार के पौधे होते हैं इनकी ऊँचाई काफी कम होती है इनका तना मुलायम होता है, जैसे –सरसों, मूली, तुलसी आदि
  1. पुष्प विहीन पौधे वे पौधे जिनमें फूल नहीं लगते, पुष्प विहीन पौधे कहलाते हैं। कुछ पुष्प विहीन पौधे में जड़, तना शाखा आदि स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती है, जैसे- शैवाल, मॉस, फर्न कवक, आदि।

पौधों के भाग (CTET UPTET Study Material 2018 in Hindi)

पौधे को संरचना की दृष्टि से निम्नलिखित पाँच भागों में बाँटा जाता है

  1. जड़ पौधे का वह भाग जो भूमि क अन्दर रहता है, जड़ कहलाता हैं। जड़े दो प्राकार की होती हैं
  • मूसला जड़ इस प्रकार की जड़ों में एक मुख्य जड़ होती है। यह जमीन के अन्दर सीधे नीचे की र वृद्धि करती है। इस जड़ से अनेक शाखाएँ निकलती हैं।
  • रिशेदार जड़ कुछ पौधों में मुख्य जड़ नहीं होती बल्कि रेशे जैसी बहुत-सी जड़े होती हैं। इन्हें रेशेदार जड़ें कहते हैं। घास एवं छोटे पौधों में इसी प्रकार की जड़े पाई जाती हैं।
  1. तना पौधे का वह भाग जो सामान्यत: भूमि के ऊपर रहता है और पौधों को एक आकार प्रदान करता है, तना कहलाता है। तने का रंग हरा होता है। इसमें गाँठें होती हैं। इन गाँठों से ही पौधे की टहनियाँ निकलती हैं। यह पौधे का सबसे मजबूत भाग होता है।

तने का कार्य (CTET UPTET Study Mateial)

  • पौधों को यान्त्रिक मजबूती प्रदान करना।
  • जड़ों के द्वारा अवशोषित किए गए जल एवं खनिज लवणों को पत्तियों तथा फलों तक पहुँचाना तथा पत्तियों से भोजन को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाना।

रूपान्तरित तना कुछ तने जमीन या जल की सतह से थोड़ा ऊपर या नीचे उगते है, रूपान्तरिक तने कहलाते हैं। आलू, अदरक, प्याज, लहसुन, आदि रूपान्तरित तनों के उदाहरण हैं। रूपान्तरिक तनों को मुख्य रूप से भोजन के रूप में प्रयोग किया जाता है। ये तने भविष्य के लिए भोजन का संग्रह करते हैं।

  1. पत्तियाँ पत्तियों का रंग सामान्यत: हरा होता है। पत्ती का बह भाग जिसके द्वारा वह तने से जुड़ी होती है, पर्णवृत्त कहलाता है। पत्ती के चपटे हरे भाग को फलक कहते हैं। पत्तियों का हरा रंग, उसमें हरें वरणक के कारण होता है। इन वर्णकों को क्लोरोफिल (पर्णहरित) कहा जाता है। हरी पत्तियों को भोजन बनाने के लिए सूर्य का प्रकाश, हवा र जव की आवश्यकता होती है। सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में भोजन बनाने की प्रक्रिया को प्रकाश-संश्लेषण कहा जाता है।

पत्तियों के कार्य (CTET UPTET Study Material 2018)

  • प्रकाश –संश्लेषण द्वारा पौधों के लिए भोजन बनाती है।
  • पत्तियों द्वार ही पौधों में श्वसन क्रिया होती है।
  1. पुष्प पुष्प विभिन्न रंगों के होते हैं। सभी पुष्प एक प्रकार के नहीं होते। सभी पुष्पों की गन्ध समान नहीं होती है। ये अनेक आकार, आकृति और रंग के होते हैं। खिले हुए पुष्प का प्रमुख भाग पुष्प की पंखुड़ियाँ हैं। विभिन्न पुष्पों की पंखुडियाँ अलग-अलग रंगों की होती हैं कलिका में यह पंखुड़िया बन्द होती हैं। कली का प्रमुख भाग छोटी पत्ती की भाँति दिखाई देता है इन्हें बाह्रादल कहते हैं। इसके केन्द्र में स्थित भाग को स्त्रीकेसर कहते है। अण्डाशय के अन्दर छोटी-छोटी गोल संरचनाएँ होती है, इन्हें बीजाण्ड कहते हैं।

पुष्पों के कार्य (CTET UPTET Practice Paper)

  • पुष्प पौधों की शोबा बढ़ाते हैं।
  • ये फल और बीज उत्पन्न कहते है।
  • ये प्रजनन में सहायता करते है।
  1. फल विभिन्न प्रकार के पौधों के फलों का आकार, रंग एवं बनावट भिन्न-भिन्न होते हैं। फूल के अण्डाश्य भाग में बनते हैं और वे वही से निकते हैं।

फल के कार्य (CTET UPTET Model Paper in Hindi)

  • फल बीज की रक्षा करते हैं।
  • बीजों को दूर-दर तक फैलाने में मदद करते हैं।

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