68500 Assistant Teacher Bharti Anekaarthak Shabd Study Material in Hindi

68500 Assistant Teacher Bharti Anekaarthak  Shabd Study Material in Hindi

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अनेकार्थक शब्द

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

Very Short Question Answer

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प्रश्न – अनेकार्थक शब्द किसे कहते हैं?

उत्तर – जब एक शब्द के अनेक अर्थ निकले, तो उसे अनेकार्थक शब्द कहते हैं। विशेष स्थिति, प्रसंग, पात्र एवं स्थान आदि के कारण एक ही शब्द के अर्थ बदल जाते हैं।

प्रश्न – कनक का अनेकार्थक शब्द क्या है?

उत्तर – कनक का आशय सोना, धतूरा और पलाश से होता है।

प्रश्न – कृष्ण का अनेकार्थक शब्द क्या हैं?

उत्तर – कृष्ण का आशय काला, माह का एक पक्ष तथा वेदव्यास (जिन्हें कृष्ण द्वैपायन के नाम से भी पुकारा जाता है) है।

विशिष्ट परीक्षा सामग्री

अक्ष- आँख, सर्प, ज्ञान, मण्डल, रथ, चौसर का पासा, धुरी, हरिया, आत्मबलि।

अरुण- लाल, सूर्य, सूर्य का सारथी इत्यादि।

अम्बर- वस्त्र, आकाश, कपास, एक इत्र, अभ्रक, एक नजर, मेघ।

अर्क- सूर्य, मदार का पौधा, इन्द्र, स्फटिक, काढ़ा, तांबा, विष्णु।

अपवाद- कलंक, वह प्रसंग जो सामान्य नियम के विरुद्ध हो।

अंक- गोद, गिनती के अंक, नाटक के अंक, चिन्ह्र,  संख्या।

अक्षर- ब्रह्रा, विष्णु, अकारादि वर्ण, शिव, धर्म, मोक्ष, गगन, सत्य, जल, नित्य।

अमृत- अमिय, स्वर्ग, जल, पारा, दूध, अन्न।

अपेक्षा- इच्छा, आवश्यकता, आशा, बनिस्बत।

आत्मा- तपोभूमि, आश्रय स्थान, जीवन का चार भागों में विभाजन।

आँख- नेत्र, दृष्टि, निगरानी, संतान।

आश्रम- तपोभूमि, आश्रय स्थान, जीवन का चार भागों में विभाजन।

आतुर- उत्सुक, उतावला, रोगी, कमजोर, दु:खी।

आम- मामूली, सर्वसाधारण, आम का फल।

इन्दु- चन्द्रमा, कपूर, गणित में एक की संख्या।

इड़ा- पृथ्वी, गाय, वाणी, स्तुति, अन्न, स्वर्ण, दुर्गा, नाड़ी विशेष।

उगना- उदय होना, निकल आना, पैदा होना, प्रकट होना।

उग्र- भयानक, क्रूर, तीव्र, कष्टदायक, प्रचण्ड, महादेव, गरम, सूर्य।

उल्लास- प्रकाश, झलक, एक अलंकार, ग्रंथ का भाग, पर्व, सर्ग।

उपाचार- व्यवहार, प्रयोग, चिकित्सा, सेवा, धर्मानुष्ठान, घूस, खुशामद।

उमा- पार्वती, दुर्गा, हल्दी, अलसी, कीर्ति, कान्ति।

उषा- प्रभात, अरुणोदय की लालिमा, बाणासुर की कन्या।

उर्मि- लहर, पीड़ा, दु:ख, शिकन, कपड़े की सिलवट।

कनक- सोना, धतूरा, गेहूं, आटा, नागकेसर, खजूर।

कर- किरण, हाथ, टैक्स, सूंड, ओला, छल।

कर्ण- कान, कुन्ती का पुत्र, समकोण त्रिभुज में सामने की भुजा।

काल- समय, मृत्यु, शत्रु, अवसर, यमराज, अकाल।

कमल- एक फूल, एक मांसपिण्ड, जल तांबा।

कृष्ण- वेदव्यास, काला, कृष्ण भगवान, एक पक्ष, चन्द्रमा का धब्बा।

केतु- ध्वजा, एक ग्रह, पुच्छल तारा, ज्ञान, प्रकाश।

कटक- सेना, शिविर, समूह, कड़ा, श्रृंखला, चटाई।

कट्टर- कठोर, कठिन, कंकड़, कर्कश, तेज, एक आभूषण।

कड़ा- कठोर, कठिन, कंकड़, कर्कश, तेज, एक आभूषण।

कर्ता- करने वाला, बनाने वाला, परिवार का मुखिया, पहला कारक।

कलम- लेखनी, कूँची, कनपटी के बाल, पेड़-पौधों की हरी लकड़ी।

कुंभ- प्रयाग तीर्थ का बारहवें वर्ष का मेला, हाथी के मस्तक के दोनों ओर का भाग, घड़ा।

कलि- कलह, दु:ख, पाप, चार युगों में चौथा युग, सूरमा, संग्राम, काला।

कोरा- बिल्कुल नया, अप्रयुक्त, अलिखित (कागज), गुणरहित (व्यक्ति)।

क्रिया- कर्म, कार्यवाही, कर्म होने का द्योतक शब्द।

कच- बाल, पपड़ी, झुण्ड, बादल, बृहस्पति का पुत्र।

कट- हाथी का गंड स्थल, खस, शव श्मशान, काला रंग।

कोश- अण्डा, डिब्बा, तलवार की म्यान, आवरण, थैली, संचित धन, शब्दकोश, समूह।

कल- मशीन, चैन, आने वाला कल/बीता कल, शान्ति, सुन्दर मधुर ध्वनि, आराम।

कौशिक- विश्वामित्र, इंदु, सवेरा, उल्लू, देवता।

खण्ड- भाग, देश, वर्षा, समीकरण की एक क्रिया, खांड, दिशा।

खल- दुष्ट, धतूरा, तलछट, चुगलखोर।

खर- गधा, तिनाक, एक राक्षस, दुष्ट, प्रखर।

गण- समूह, श्रेणी, सेना का एक भाग, पिंगल शास्त्र में तीन वर्गों का समूह, शिव के सेवक, दूत, अनुचर।

ग्रह- तारे, नौ की संख्या लेना, अनुग्रह, कृपा, ग्रहण, राहु।

गुण- विशेषता, धर्म, प्रकृति के तीन भाव, निपुणता, कोई कला अथवा विद्या, प्रभाव, शील, सद्वृत्ति, कौशल।

गौ- गाय, किरण, वृष राशि, इंद्रिय, वाणी, सरस्वती, आँख, दृष्टि, बिजली, पृथ्वी, नंदी, नमक, शिवगण, घोड़ा, सूर्य, चन्द्रमा, बाण, आकाश, स्वर्ग, जल।

ग्रहण- लेना, पकड़ना, सूर्य-चंद्र पर राहु-केतु का प्रभाव।

गंभीर- गहरा, घना, भारी, जटिल, चिंताजनक, शान्त।

गाँठ- फंदा, गठरी, गिरह, मनमुटाव, उलझन।

गाड़ना- जमीन में दबाना, धंसना, खड़ा करना (झण्डा)।

गुलाबी- गुलाब के रंग का, हल्का (जाड़ा), गुलाब का।

गायत्री- एक वैदिक छन्द, एक वैदिक मंत्र, दुर्गा।

गिरा- वाणी, सरस्वती, जिह्रा।

गोपाल- गाय पालने वाला, कृष्ण, ग्वाला, किसी बालक का नाम।

गौतमी- हल्दी, गोदावरी नदी, गोरोचन।

घन- बादल, घना, किसी संख्या को उसी संख्या से दो बार गुणा करने पर गुणनफल, भारी हथौड़ा।

घोर- बहुत घना, बहुत अधिक, बहुत बुरा, भयानक।

घुमाना- मोड़ना, चक्कर देना, लट्टू चलाना, प्रचारित करना, सैर करना।

घाट- किसी जलाशय या नदी का वह स्थान जहां लोग पानी भरते और नहाते हैं, पहाड़, पहाड़ी मार्ग।

घुटना- कष्ट सहना, सांस लेने में कठनाई, पैर का जोड़ भाग।

चन्द्र- चन्द्रमा, एक की संख्या, मोर की पूँछ की चंद्रिका, कपूर, जल, सोना, भूगोल का उपद्वीप, साधु, नासिक, वर्ण की (ऊपर) बिंदी, हीरा।

चाल- रफ्तार, गति, चलने का ढंग, आहट, चालाकी, मोहरों का हिलना, रिवाज, धोखा।

चाप- परिधि का एक भाग, (आलू) टिकिया, दबाव, धनुष।

चाक- कुम्हार का चाक, चक्की, गोल वस्तु, पानी का भँवर, बवण्डर, समूह, एक प्रकार का युद्ध व्यूह मण्डल।

जुड़ना- जुटना, सम्मिलित होना, मिलना, जोड़ा जाना, जोता जाना।

चरण- पैर, बड़ों का संग, किसी छन्द का एक पद, किसी चीज का एक चौथाई भाग, अनुष्ठान, गोत्र, आचार, सूर्य आदि की किरण।

जड़- मूल, मूर्ख, हठी, अचेतन, चेष्टाहीन, शीतल, गूँगा, बहरा, नींव।

जलज- बड़ा, श्रेष्ठ, पति का बड़ा भाई, जेठ का महीना।

जाल- फरेब, बुनावट, जाला, जमघट, बड़ी जाली।

जन- लोग, प्रजा, गंवार, अनुचर, समूह, भवन मजदूरी, सात लोकों में से एक।

जलना- शरीर तपना, ईर्ष्या करना, भस्म हो जाना, आग लगना।

जलाना- आग देना, प्रज्वलित करना, चुभती बातें कहना, ईर्ष्या उत्पन्न करना।

जोड़ना- योग करना, एकत्र करना, बढ़ाना, मिलाना।

झंझरी- झरोखा, जाली, छाननी, पीने की सुराही।

झाड़- पौधों का झुरमुट, एक आतिशबाजी, गुच्छा, डाँट-फटकार।

टीका- फलदान, तिलक, मस्तक का गहना, श्रेष्ठ, व्याख्या।

टेक- सहारा, गीत का छोटा पद, आग्रह, आदत, सहारा देने की लकड़ी।

टाँकना- सुई से कुछ जोड़ना, रकम लिख रखना, (चाकू या छूरी) तेज करना।

ठाकुर- देवता, ईश्वर, मालिक, सरदार, जमींदार, क्षत्रिय, नाईं।

डूबना- अस्त होना, पानी के नीचे जाना, नष्ट होना, समाप्त होना।

ढलना- ह्रास की ओर बढ़ना, ढलान की ओर जाना, बालि की पत्नी, बृहस्पति की पत्नी।

तीक्ष्ण- धारदार, तेज, प्रचंड, उग्र, चरपरा।

तीर- नदी का तट, बाण, समीप।

तम- अंधकार, राहु, सुअर, पाप, क्रोध, अज्ञान, मोह।

तल- नीचे का भाग, पेंदा, जल के नीचे की भूमि, पैर का तलवा, हथेली, सतह, सप्त पातालों में से एक।

तत्व- मूल, यथार्थ, सार, पंचभूत, ब्रह्रा।

तात- पिता, पूज्य, धारा, मर्म, बड़ा, गुरु, भाई, मित्र।

ताप- ज्वर, आंच, कष्ट, मानसिक कष्ट, तीन प्रकार के ताप (आध्यात्मिक, आधिवैदिक एवं आधिभौतिक) उष्णता।

तक्षक- विश्वकर्मा, बढ़ई, सूत्रधार, सर्प विशेष।

तिलक- टीका, राज्याभिषेक, एक गहना, श्रेष्ठ व्यक्ति, घोड़े की एक विशेष जाति, ग्रंथ की व्याख्या।

तुला- तुलना, तराजू, तौल, एक राशि।

दोष- कमी, विकार, अपराध, बुराई, ऐब।

दण्ड- डण्डा, सजा, समय का विभेद, यम, अस्त्र, बांस की विशेष लकड़ी जिसे दण्डी स्वामी ग्रहण करते हैं।

द्विज- अण्डज, प्राणी, पक्षी, ब्राह्राण, चन्द्रमा, दाँत।

दल- समूह, पत्ता, फूल की पंखुड़ी, मंडली, सेना।

दक्ष- चतुर, ब्रह्रा क पुत्र का नाम, प्रजापति।

द्रोण- द्रोणाचार्य, कौआ, दोना, एक पर्वत विशेष, बिच्छू, लकड़ी का रथ।

द्वार- दरवाजा, अंश, साधन, शरीर के छिद्र वाले अंग।

ध्रुव- स्थिर, निश्चित, पर्वत, राजा उत्तानपाद का पुत्र।

धनञ्जय- अग्नि, चित्रक, वृक्ष, अर्जुन का नाम, अर्जुन वृक्ष, विष्णु, शरीर की पञ्चवायु में एक।

धात्री- माता, आँवला, पृथ्वी, उपमाता, धाय।

धन- सम्पत्ति, गणित में जोड़ का चिन्ह्, मूल, पूँजी।

नक्शा- मानचित्र, रुपरेखा, आकृति, लच्छन, नखरा।

नायक- सेनापति, छोटा सेनाधिकारी, मुखिया, नाटक का मुख्य पात्र।

नाल- नली, अर्धचन्द्राकार लोहा, डंडी, डंठल।

नग- पर्वत, रत्न-विशेष (नगीना), सूर्य, सर्प, वृक्ष।

निशाचर- चोर, उल्लू, प्रेत, राक्षस।

निष्कर्ष- सारांश, अन्तिम, परिणाम, निश्चय।

नाक- नासिका, शोभा की वस्तु, प्रतिष्ठा, स्वर्ग, आकाश।

नीलकंठ- शिव, मोर, एक पक्षी-विशेष।

नेपथ्य- वेशभूषा, सजावट, रंगमंच का पिछला भाग।

न्यास- धरोहर, भेंट, उपस्थित करना, त्याग, ट्रस्ट।

पय- दूध, पानी, अन्न।

पति- स्वामी, दूल्हा, ईश्वर, इज्जत, प्रतिष्ठा।

पद- पैर, ओहदा, वाक्यांश, छंद का चरण, पात्र, निशान, किरण, प्रदेश।

पक्ष- पंख, दल, पन्द्रह दिन की अवधि (पखवारा), पार्श्व।

पतंग- सूर्य, पक्षी, गुड्डी, पतंगा, नाव।

पानी- जल, इज्जत, चमक, वर्षा, स्वाभिमान।

पृष्ठ- पीठ, पन्ना, पीछे का भाग, ऊपरी सतह।

पार्थिव- पृथ्वी का, राजसी, मिट्टी का शिवलिंग।

पोत- जहाज, बच्चा, वस्त्र, गुड़िया।

पंचानन- सिंह, शिव, प्रकांड विद्वान।

पक्का- ईंटों का बना, पुष्ट, निश्चित, स्थिर।

पट- कपड़ा, परदा, किवाड़।

पत्र- पत्ता, चिट्ठी, पंख, समाचार-पत्र, धातु का पत्तर।

पता- ठिकाना, भेद, मालूम होना, सूचना।

पयोधर- बादल, तालाब, स्तन, पर्वत।

पर्चा- प्रश्न-पत्र, कागज, अखबार।

परिकर- समूह, कमरबंद, परिवार, नौकर-चाकर।

पल्ला- आँचल, तराजू का पलड़ा, दिशा, किवाड़।

पाटी- पंक्ति, रीति, तख्ती, चारपाई की पट्टी।

पुराना- प्राचीन, ढेर सारे दिनों का, जीर्ण-शीर्ण, अनुभवी (व्यक्ति)।

पुष्कर- तालाब, कमल, पानी, मद।

पुष्ट- पक्का, परिपूर्ण, सिद्ध, दृढ़, पाला-पोसा।

पेशी- मुकदमे की सुनवाई, पेश होने की अवस्था, शरीर का पुट्ठा, तलवार की म्यान।

प्रत्यय- विश्वास, शब्द के पीछे जोड़ा जाने वाला अक्षर या अक्षर समूह।

प्रपंच- झंझट, बखेड़ा, मिथ्या, जगत, विस्तार।

प्रभाव- सामर्थ्य, असर, महिमा, दबाव।

पाक- पकाने की क्रिया, रसोई, वचन, पवित्र, निर्दोष।

पर- पंख, ऊपर, दूसरा, किन्तु, पराया।

बहार- बसंत ऋतु, आनंद, रोचक, एक राग विशेष।

बंधन- बाँधने की चीज, कैद, बाँध, पुल।

बौराया- पागल, जिसमें बौर लग गया हो।

बचाना- रक्षा करना, खर्च से बचाना, सामने न आने देना।

बल- शक्ति, सेना, सहारा, चक्कर, मरोड़।

बिन्दु- बूँद, कण, शून्य, अनुस्वार, चिन्ह्।

बंशी- बांसुरी, मछली फंसाने का कांटा।

भगवान- ईश्वर, ऐश्वर्यशाली, महापुरुष, पूज्य, ज्ञान और वैराग्य से सम्पन्न।

भाव- विचार, अभिप्राय, श्रद्धा, दर, अस्तित्व, मुखाकृति।

भूत- प्रेत, शरीर के पंचभूत, बीता काल।

भेद- रहस्य, अंतर, फूट, छेदन।

भोग- कर्मों का फल, कब्जा, विलास, देवता का खाद्य पदार्थ, सुखानुभव।

मान- इज्जत, नाप-तौल, अभिमान, रुठना, घमंड।

महीधर- पर्वत, शेषनाग, एक वर्णिक छन्द।

माया- भ्रम, दौलत, इंद्रजाल, भगवान की लीला।

मूल- जड़, कंद, आरंभ, पंजी, नींव, मुख्य।

मुद्रा- सिक्का, मोहर, अँगूठी, छापा, चिन्ह्र, आकृति।

मद- हर्ष, कस्तूरी, नशा, गर्व, मतवाला।

योग- मेल, लगाव, ध्यान, कुल, जोड़, शुभकाल, मन की साधना।

रक्त- लाल, खून, केसर, लाल चंदन।

रस- निचोड़, स्वाद, आनन्द, धातु का भस्म।

रसाल- आम, ईख, रसीला, मीठा।

रंग- वर्ण, शोभा, मनोविनोद, रोब, नाच-गाना, ढंग, युद्ध क्षेत्र।

राशि- किसी का उत्तराधिकारी, मेष, वृष आदि राशियाँ, धन।

लगाना- जोड़ना, चिपकाना, मारना, खर्च कर देना, नियुक्त करना, आरम्भ कराना, सटाना, चुभना।

लंगर- लोहे का कांटा, जंजीर, लँगोट, कच्ची सिलाई, भारी, रुका रहना, नटखट, गरीबों में बांटा जाने वाला भोजन।

लय- एक पदार्थ का दूसरे में मिलना, ध्यान में डूबना, अनुराग, प्रलय।

लाल- बेटा, छोटा, प्रिय बालक, श्रीकृष्ण, लाड़-प्यार, चाह, रक्तवर्ण, बहुत क्रुद्ध।

वर्ण- अक्षर, रंग, जाति, शब्द, सोना, रुप, चातुर्वर्ण्य (ब्राह्रण, क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र)।

विधि- कानून, भाग्य, ब्रह्रा, अग्नि, समय, विष्णु, युक्ति, व्यवस्था, तरीका, विधाता।

विधान- अनुष्ठान, व्यवस्था, प्रणाली, रचना, ढंग, आज्ञा करना।

विग्रह- लड़ाई, शरीर, देवता की मूर्ति, विश्लेषण।

वार- आक्रमण, दिन, बाण, शिव, बारी, अवसर, द्वार।

वन- दूल्हा, श्रेष्ठ, वरण करने योग्य, वरदान।

विचार- राय, सलाह, ध्यान, मान्यता।

विभूति- ऐश्वर्य, बहुतायत, दिव्य, शक्ति, राख, महिमामय, पुरुष।

विवेचन- तर्क-वितर्क, सत्-असत् विचार, निरुपण, परीक्षण।

वृत्त- गोल घेरा, वृत्तांत, चरित्र, वर्णिक छन्द।

वेला- अवकाश, समय, समुद्र की लहर।

व्यवहार- काम, बरताव, महाजनी, दीवानी, मामला, मुकदमा।

सैंधव- नमक, सिंधु देश का घोड़ा।

संकोच- सिकुड़ना, लज्जा, हिचकिचाहट।

संज्ञा- संकेत, ज्ञान, नाम, चेतना।

संधि- जोड़, अक्षरों का मेल, युगों का मिलन, पारम्परिक, निश्चय, सेंध।

संस्कार- परिशोध, सफाई, धार्मिक कृत्य, आचार-व्यवहार, मन पर पड़ने वाले प्रभाव।

सधना- आशय पूरा होना, अभ्यस्त होना, ठीक जगह पर लगना।

सम्बन्ध- जोड़, मेल-जोल, रिश्ता, ताल्लुक, व्याकरण में छठां कारक।

सरल- ईमानदार, सीधा, आसान, खरा।

सही- हस्ताक्षर, सच, ठीक, प्रामाणिकता।

साधन- उपाय, उपकरण, सामान, पानल, कारण।

साधना- सिद्ध करना, मनोयोगपूर्वक आराधना सम्पन्न करना, पक्का करना, अपने वश में करना।

साफ- निर्मल, निर्दोष, समतल, शुद्ध, स्पष्ट, निश्छल, (हिसाब) चुकता।

सारंग- कोयल, चातक, मोर, हंस, बाज, सिंह, घोड़ा, हाथी, एक मृग, सूर्य, चन्द्रमा, सोना, भौंरा, धनुष, बादल।

सोम- एक देवता, चन्द्रमा, सोमवार, कुबेर, यम, अमृत, वायु, जल, स्वर्ग।

सेहत- सुख, स्वास्थ्य, रोग से छुटकारा।

स्नेह- प्रेम, तेल, चिकना, पदार्थ, कोमलता।

हरि- विष्णु, इंद्र, सर्प, सूर्य, घोड़ा, चाँद, किरण, हंस, आग, हाथी, कामदेव।

हंस- प्राण, सूर्य, आत्मा, शिव, ब्रह्रा, विष्णु, एक प्रकार का पक्षी।

हेम- बर्फ, स्वर्ण, इज्जत, पीला रंग।

हर- प्रत्येक, शिव, हरण करने वाला, भिन्न में अंश के नीचे की संख्या।

हार- पराजय, थकावट, हानि, विरह, माला, सुन्दर, भाजक, नाश करने वाला।

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